20 फरवरी 2026 को India AI Impact Summit 2026 के अंतिम दिवस पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में एक से अधिक घटनाओं ने सुर्खियाँ बटोरीं और कार्यक्रम में अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया। ये समिट जहाँ तकनीकी जगत और वैश्विक नेतृत्व को एक मंच पर लाने वाला था, वहीं कुछ राजनीतिक प्रदर्शन, ट्रैफिक संकट और आलोचनाओं ने भी इसे विवादित बना दिया।
पढ़ें :- US की बड़ी सैन्य तैयारी: ईरान पर संभावित हमला और मध्य पूर्व में सबसे बड़ी एयरपावर तैनाती
शर्टलेस प्रदर्शन ने खड़ा किया बड़ा विवाद
20 फरवरी को भारतीय युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने समिट स्थल पर शर्टलेस प्रदर्शन किया जिसमें उन्होंने अपनी कमीज़ उतारकर विभिन्न स्लोगन और संदेशों के साथ विरोध जताया।
वे protesters भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, एपस्टीन फाइल्स और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर आवाज़ उठा रहे थे, जिससे समिट के माहौल में अचानक राजनीतिक तनाव आ गया।
- इस प्रदर्शन के कारण करीब 10 लोगों को हिरासत में लिया गया, और मामला दर्ज किया गया।
- कई लोगों ने कहा कि यह भारत की विश्व छवि को नुकसान पहुँचाता है, खासकर जब देश वैश्विक AI मंच पर खुद को प्रस्तुत कर रहा है।
- वहीं बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के इस प्रदर्शन की बेहद आलोचना की और इसे “निंदनीय” कहा।
- कुछ विपक्षी नेताओं ने समिट को “PR स्टंट” बताया और आयोजन-प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए।
यह कदम तकनीकी समिट के माहौल में राजनीतिक रंग भरने का कारण बना, और मीडिया में शुक्रवार को यही सबसे बड़ी खबर बनी।
दिल्ली में ट्रैफिक का भी बड़ा समस्या
- समिट के अंतिम दिन दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों पर प्रमुख वीआईपी मूवमेंट के कारण भारी ट्रैफिक जाम दर्ज हुआ।
- सुबह 8–10 बजे और शाम 5–9 बजे के बीच कई मुख्य रास्तों पर वाहनों की धीमी चाल और अफ़रा-तफ़री रही।
- यातायात पुलिस ने सदार पटेल मार्ग, जनपथ, मदर टेरेसा क्रेसेंट, Mathura Road समेत कई सड़कों पर पाबंदियाँ लगाई।
- भारी ट्रैफिक के कारण कई लोगों को आज समिट स्थल छोड़कर निकलने में समस्याएँ आईं, खासकर जब वीआईपी आगमन-जाने के क्रम में सड़कों को धीरे-धीरे बंद किया गया।
डिलिवरी सेवा, टैक्सी और कैब सेवाओं पर इसका सीधा असर दिखा और कई लोगों को लंबी दूरी पैदल चलकर ही निकलना पड़ा, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक व्यवस्था के बारे में आलोचनाएँ तेज़ हो गईं।
पढ़ें :- पाकिस्तान पर बड़ा जल संकट? रवि नदी परियोजना से बदलेगा समीकरण
समिट में कार्यों को लेकर भी आलोचना
समिट के शुरुआत के दिनों में कुछ कार्यक्रम व्यवस्थित न होने, भीड़-भाड़, लंबी लाइनों और सत्रों का मिस हो जाना जैसे मुद्दे सामने आए थे, जिन्हें शुक्रवार को भी कई लोगों ने याद किया। हालांकि आयोजकों ने इसे बड़े आयोजन की सामान्य समस्याएँ बताया, कुछ आगंतुकों ने कहा कि लॉजिस्टिक्स और मार्गदर्शन बेहतर होना चाहिए था।
कुल मिलाकर, 20 फरवरी को समिट का तकनीकी लक्ष्य और वैश्विक विमर्श तो जारी रहा, लेकिन राजनीतिक प्रदर्शन, ट्रैफिक बाधाएँ और आलोचनाएँ इसे एक विवादित दिवस भी बना गईं ऐसे में कार्यक्रम को केवल एक तकनीकी सम्मेलन ही नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीतिक और सार्वजनिक व्यवस्था की परीक्षा भी कहा जा रहा है।
निष्कर्ष
20 फरवरी 2026 का दिन AI Impact Summit 2026 के लिए दोहरे स्वरूप वाला साबित हुआ:
- एक ओर यह वैश्विक तकनीकी चर्चा और रणनीति का मंच रहा
- दूसरी ओर यह राजनीतिक विरोध, अथक ट्रैफिक समस्या और आलोचनाओं का दिन भी बन गया
और जैसे-जैसे दुनिया AI के भविष्य पर भारत को देख रही है, यह भी स्पष्ट हुआ कि बड़े आयोजन में प्रबंधन, सार्वजनिक अनुभव और राजनीतिक संतुलन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितना तकनीकी सत्र और वैश्विक भागीदार।