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पाकिस्तान पर बड़ा जल संकट? रवि नदी परियोजना से बदलेगा समीकरण

भारत सरकार ने घोषणा की है कि रवि नदी के अतिरिक्त पानी को अब पाकिस्तान की ओर नहीं जाने दिया जाएगा। यह कदम शाहपुर कांडी बाँध के नज़दीक पूरा होने के साथ शुरू होने वाला है, जिससे पानी को भारतीय क्षेत्रों में मोड़ा और उपयोग किया जा सकेगा।

By HO BUREAU 

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रवि नदी का पानी पाकिस्तान को नहीं जाने दिया जाएगा

भारत सरकार ने घोषणा की है कि रवि नदी के अतिरिक्त पानी को अब पाकिस्तान की ओर नहीं जाने दिया जाएगा। यह कदम शाहपुर कांडी बाँध के नज़दीक पूरा होने के साथ शुरू होने वाला है, जिससे पानी को भारतीय क्षेत्रों में मोड़ा और उपयोग किया जा सकेगा। यह निर्णय विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों में तेज़ चल रही सूखे तथा जल संकट को ध्यान में रखकर लिया गया है।

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शाहपुर कांडी प्रोजेक्ट, जो वर्ष 2024 के बाद से क्रियान्वयन में है, रवि नदी के पानी को जम्मू-कश्मीर और पंजाब के अंदर जाकर बाँध और नहरों के माध्यम से बाँटने में सक्षम करेगा। इससे न केवल कृषि और सिंचाई को मदद मिलेगी, बल्कि सूखे प्रभावित इलाक़ों में पानी की उपलब्धता सुधरेगी।

इंदुस वाटर ट्रीटी (IWT) पर बढ़ते तनाव और स्थिति

भारत ने इंदुस वाटर ट्रीटी (Indus Waters Treaty) को 23 अप्रैल 2025 से अस्थायी रूप से निलंबित (suspend) कर दिया है, जो 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के साझा उपयोग का करार था। इस समझौते के अनुसार पाकिस्तान को चीनाब, झेलम और रवि जैसी नदियों का हिस्सा मिलता था, लेकिन आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं और सुरक्षा कारणों से भारत ने इसका पालन फिलहाल रोक दिया है।

Suspension के बाद भारत ने चेनाब नदी पर बागलिहार बाँध से पानी रोकने जैसी रणनीतिक कार्रवाई भी की थी, जो पाकिस्तान में कृषि और बिजली उत्पादन पर असर डाल सकता है। पाकिस्तान ने इस कदम का कड़ा विरोध किया था और कहा था कि यदि भारत पानी के प्रवाह को बाधित करता है, तो यह “युद्ध की कार्रवाई” जैसा माना जाएगा।

शाहपुर कांडी बाँध क्यों महत्वपूर्ण है

भारत के अधिकार: इंदुस वाटर ट्रीटी के तहत पूर्वी नदियाँ (Ravi, Beas, Sutlej) का उपयोग भारत को अधिकार प्राप्त है, जबकि पश्चिमी नदियाँ पाकिस्तान को अधिकतर हिस्सेदारी देती हैं। रवि नदी पर बनाए जा रहे बाँध से भारत को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि अतिरिक्त पानी भारत के उपयोग में रहे।

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जल संकट का समाधान: काठुआ और सांबा जिलों जैसे सूखे-प्रवण इलाक़ों में पानी की आवश्यकता बढ़ रही थी। इस बाँध के पूरा होने से सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और कृषि उत्पादन को नई ऊर्जा मिलेगी।

भूराजनीतिक संकेत: यह कदम केवल संसाधन प्रबंधन नहीं, बल्कि एक संदेश भी है कि भारत अपनी जल सुरक्षा और विकास प्राथमिकताओं के लिए स्वतंत्र निर्णय ले रहा है।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और द्विपक्षीय तनाव

पाकिस्तान ने भारत की इस पहल की कड़ी आलोचना की है और इसे “जल आक्रमण” के रूप में स्थान दिया है। देश के जल विभाग ने बैठक में निर्णय लिया कि भारत के एक-तरफ़ा कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया जाए और इसे त्यागकर पानी साझा करने की पुरानी व्यवस्था को बहाल रखने का आग्रह किया जाए।

सरकार ने यह भी कहा कि अगर भारत ने पानी के प्रवाह को बाधित किया, तो यह दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा सकता है और क्षेत्र में शांति प्रभावित हो सकती है।

निष्कर्ष- सुरक्षा, जल और रणनीति का संगम

भारत द्वारा रवि नदी का अतिरिक्त पानी रोकने का कदम और इंदुस वाटर ट्रीटी को रोकना सिर्फ़ तकनीकी निर्णय नहीं, बल्कि रणनीतिक भू-राजनीतिक निर्णय भी माना जा रहा है:

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  • यह कदम भारत की जल सुरक्षा और विकास प्राथमिकता को रेखांकित करता है।
  • पानी के उपयोग को प्रशासनिक नियंत्रण में रखने की क्षमता बढ़ाता है।
  • पाकिस्तान के साथ मौजूदा तनाव को और गहरा कर सकता है।
  • क्षेत्रीय शांति और समझौतों की दिशा में एक बड़ा मोड़ हो सकता है।

जल मुद्‍दा अब केवल कृषि या सिंचाई का विषय नहीं रहा, यह दक्षिण एशिया में राजनीतिक शक्ति और सुरक्षा नीति का एक प्रभावशाली उपकरण बन चुका है।

✍️सपन दास  

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