नई दिल्ली, 5 फरवरी। विश्व प्रसिद्ध हजरत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर आज बसंत पंचमी पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर दरगाह पर आने वाले जायरीन के जरिए पूरे अकीदत और ऐहतेराम के साथ पीले फूल और पीले फूलों से बनी चादर दरगाह पर पेश की गई। इस अवसर पर दरगाह को पीले फूलों और बिजली के पीले कुमकुमों आदि से खासतौर से सजाया गया है। वसंत के अवसर पर दरगाह को विशेष तौर से सजाए जाने का यह दिलकश नजारा काफी मनमोहक लगा।
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हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह में वर्षों से मनाई जाती है बसंत पंचमी
दिल्ली की बस्ती हजरत निजामुद्दीन स्थित हजरत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर वसंत मनाने का सिलसिला हजरत ख्वाजा के जीवन काल में ही शुरू हो गया था जो कि अभी तक हर साल मनाया जाता है। दरगाह पर बसंत मनाने की शुरुआत के पीछे की कहानी भी कम रोचक नहीं है। बताया जाता है कि हजरत निजामुद्दीन औलिया के बहुत ही चहेते और पसंदीदा भांजे की मृत्यु हो गई थी, जिसकी वजह से वह काफी उदास रहने लगे थे। इस गम में उन्होंने अपने आपको एक कमरे में बंद कर लिया था। ख्वाजा के खास अकीदतमंद और मुरीद इसकी वजह से काफी परेशान थे।
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ख्वाजा के खास मुरीद हजरत ख्वाजा अमीर खुसरो भी इससे परेशान थे और वह ख्वाजा को इस सदमे से बाहर लाने के लिए तरह-तरह की हरकतें करते थे मगर कोई फायदा नहीं हो रहा था। एक दिन अमीर खुसरो को कुछ महिलाएं पीला वस्त्र धारण किए पीले फूल लिए गाती-बजाती सड़क पर जाती हुई दिखाई पड़ीं। उन्हें यह नजारा काफी पसंद आया तो उन्होंने उन महिलाओं को रोककर पूछा कि आप लोग यह क्या कर रही हैं। महिलाओं ने बताया कि वह बसंत उत्सव मना रही हैं और यह सब चीजें मंदिर में चढ़ाने जा रही हैं। अमीर खुसरो को भी यह सब अच्छा लगा और उन्होंने भी एक पीला वस्त्र धारण किया और फूल माला पहनकर ढोल बजाते हुए अपने पीर हजरत ख्वाजा के कमरे के बाहर पहुंचे।
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हजरत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया उनका यह हुलिया देख कर हंस दिए। इसके बाद से ही दरगाह पर बसंत मनाने का सिलसिला शुरू हुआ जो कि अभी तक जारी है। दरगाह के मुख्य इंचार्ज काशिफ निजामी का कहना है कि वसंत उत्सव मनाने के लिए दरगाह को खासतौर से सजाया जाता है। इस दिन बड़ी तादाद में हिंदू अकीदतमंद दरगाह पर तशरीफ लाते हैं और अपना नजराना अकीदत पेश करते हैं। उनका कहना है कि आज के दिन दरगाह पर पेश की जाने वाली चादरें, माला व अन्य वस्तुएं आदि पीले रंग के फूल से खासतौर से बनाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का बसंत उत्सव कोरोना गाइडलाइंस के अनुसार मनाया गया है।