Bihar : बिहार में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अभियंता प्रमुख की ओर से सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को चेतावनी संवाद जारी कर आवश्यक एहतियाती कदम उठाने को कहा गया है।
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जल संसाधन विभाग के अनुसार, शनिवार को सुबह 9 बजे पटना के गांधीघाट गेज स्थल पर गंगा का जलस्तर 50.51 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 48.60 मीटर से 1.91 मीटर ऊपर है। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति बनी हुई है। विभाग ने विशेष रूप से चिंता जताई है कि गंगा इस स्थल पर अपने अब तक के उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 50.52 मीटर के बेहद करीब पहुंच गई है और पूर्वानुमान के अनुसार गांधीघाट पर नया उच्चतम जलस्तर बनने की संभावना है।
विभाग ने कहा है कि जलस्तर बढ़ने के कारण नदी के प्रवाह क्षेत्र, विशेषकर दियारा इलाकों में दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। चेतावनी संवाद में जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि बाढ़ आपदा के दृष्टिकोण से सभी आवश्यक एहतियाती कदम तत्काल उठाए जाएं। तटबंध के नदी भाग में बसे लोगों को गंगा के बढ़ते जलस्तर और संभावित खतरे की जानकारी देने के साथ ही आवश्यकता के अनुसार, कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इसके अलावा बाढ़ आपदा से निपटने के लिए जिलास्तर पर गठित दलों की लगातार गश्ती सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है। प्रशासन को संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है। जल संसाधन विभाग की निगरानी रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार सुबह 10 बजे गांधीघाट पर गंगा का जलस्तर बढ़कर 50.53 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान से करीब 1.93 मीटर ऊपर है। इस समय यहां जलस्तर बढ़ने की प्रवृत्ति दर्ज की गई है और यह निर्धारित एचएफएल 50.52 मीटर से भी मामूली तौर पर ऊपर पहुंच गया है।
विभाग की रिपोर्ट में गंगा के अन्य प्रमुख गेज स्थलों पर भी जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। बक्सर, बाढ़, दीघाघाट, हाथीदह, मुंगेर, सुल्तानगंज, भागलपुर, कहलगांव में भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। इनमें कई स्थानों पर जलस्तर बढ़ने की प्रवृत्ति दर्ज की गई है। विभाग ने जिला प्रशासन से कहा है कि नदी के बढ़ते दबाव को देखते हुए तटबंधों, दियारा क्षेत्रों और नदी के प्रवाह क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जाए तथा किसी भी संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव दलों को सक्रिय रखा जाए। (आईएएनएस)
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