पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। यह संकीर्ण समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति रास्तों में से एक है, जहां से लगभग 20% वैश्विक कच्चा तेल गुजरता है। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देश के लिए इस मार्ग का खुला रहना अत्यंत आवश्यक है।
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भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 80-85% आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों जैसे Saudi Arabia, Iraq और United Arab Emirates से आता है। इन देशों से आने वाला तेल अधिकतर इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि यह रास्ता किसी कारणवश बंद होता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ेगा।
हाल के वर्षों में Iran और United States के बीच तनाव बढ़ने से इस क्षेत्र में कई बार संकट की स्थिति बनी है। उदाहरण के तौर पर, 2019 में टैंकर हमलों और ड्रोन घटनाओं ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया था। यदि भविष्य में इस तरह की घटनाएं बढ़ती हैं और मार्ग अस्थायी रूप से भी बंद होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
भारत के लिए इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई दर और आर्थिक विकास पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान वैश्विक तेल कीमतों में उछाल से भारत में भी ईंधन महंगा हुआ और महंगाई बढ़ी। इसी तरह, होर्मूज मार्ग बाधित होने पर परिवहन लागत बढ़ेगी और आम उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
हालांकि, भारत ने इस जोखिम को कम करने के लिए कई रणनीतियां अपनाई हैं। सरकार ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) बनाए हैं और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों: जैसे Russia और United States से आयात बढ़ाया है। इसके अलावा, नौसेना की सक्रियता भी इस क्षेत्र में बढ़ाई गई है ताकि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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Strait of Hormuz का खुला रहना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि वर्तमान में यह मार्ग खुला है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव के कारण खतरा बना हुआ है। इसलिए भारत को दीर्घकालिक रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि किसी भी संभावित संकट का प्रभाव कम से कम हो सके।