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बजट सत्र में कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सरकार की कमियों को गिनाया

By इंडिया वॉइस 

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नई दिल्ली । राज्यसभा में आम बजट पर चर्चा जारी रही। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने बजट पर चर्चा शुरु की थी। इस चर्चा में महिला, बाल, शिक्षा व युवा कार्यक्रम के साथ ही खेल संबंधी स्थाई समिति के प्रतिवेदन पेश किये गए। जनहित से जुड़े सवाल भी राज्यसभा में पूछे गए। बजट सत्र पर चर्चा करते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इसे निराशाजनक बताया। उन्होंने अपनी चर्चा में कोविड की दूसरी लहर का जिक्र भी किया।

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बजट सत्र पर बोलते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि कोविड की दूसरी लहर में जो आकंडे बताए गए उससे कहींं अधिक लोगों ने इस दौरान अपने जान गंवाई। उन्होंने कहा करीब 5 लाख लोगों की कोरोना से मृत्यु हुई है। जो सरकारी आंकड़ों से चार से पांच गुना अधिक है। ऐसी स्थिति में हमने देखा कि बजट पहले की अपेक्षा ही पेश किया गया है। जबकि इस समय देश की अर्थव्यवस्था को दोबारा से पटरी पर लाने का कार्य नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि देश को इस समय बजट से तीन तरह की आशाएं थी। जिसमें पहली ये कि युवा के उज्जवल भविष्य के लिए कोई योजना तैयार नहीं की गई है। देश की जनसंख्या की बड़ी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने पर मजबूर है। इसके साथ ही मीडिल क्लास को भी इस बजट किसी भी तरह की राहत नहीं दी गई है। आज लोगों के बिजली के बिल भरने तक के पैसे नहीं हैं, क्योंकि लोगों के पास नौकरी ही नहीं है, जो सरकार की बड़ी खामी है।

दूसरा लोगों को सरकार से बजट में नौकरियों को बढ़ाने की योजना पर काम करने की उम्मीद थी। मनरेगा और एमएसएमई की उम्मीद थी, लेकिन इन पर भी कटौती की गई। किसानों की एमएसपी की मांग पर भी कोई फैसला नहीं लिया गया है। महंगाई पर रोक लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।

थरूर ने कहा कि हमें बीते समय से सबक लेते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना चाहिए। युवाओं की शिक्षा पर जोर देना चाहिए था। लेकिन सरकार केवल अमृत काल पर ही ध्यान दे रही है। सरकार बस लोगों को लुभाने वाले वादे ही कर रही हैं।

बजट में कहा गया है कि आने वाले सालों में 60 लाख नई जॉब लाने की बात कही जा रही है लेकिन आज करीब 5.3 करोड़ लोगों जो बिना जॉब के हैं उन पर कोई चर्चा नहीं की जा रही है।

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इतना ही नहीं बजट में किसानों की सबसीडी को कम किया गया है। इसके साथ ही देश को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है। जिसके लिए हमारे बजट को बढ़ाने की आवश्यकता थी जो बजट में देखने को नहीं मिली।

 

 

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