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भारतीय सेना ने पोखरण में स्ट्रेला-10 वायु रक्षा मिसाइल का सफल परीक्षण किया

By HO BUREAU 

Updated Date

Strela-10 missile launch in desert test

फरवरी 2026 में, भारतीय सेना के कोणार्क कोर, विशेष रूप से ब्लेजिंग स्काईज ब्रिगेड के वायु रक्षा योद्धाओं ने राजस्थान के पोखरण में स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में स्ट्रेला-10 अत्यंत कम दूरी वायु रक्षा प्रणाली का सफल उच्च तीव्रता परीक्षण किया। यह परीक्षण रेगिस्तानी क्षेत्र में भारतीय सेना की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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परीक्षण की सफलता और सटीकता

मिसाइल प्रणाली ने हवाई लक्ष्यों को सटीक रूप से भेदने की क्षमता का प्रदर्शन किया, जो चुनौतीपूर्ण भूभाग में सेना की परिचालन तत्परता और वायु रक्षा तैयारी को मजबूत करता है। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने निर्धारित लक्ष्यों को उच्च सटीकता के साथ मारा, जो इस प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रमाणित करता है। रेगिस्तानी परिस्थितियों में यह सफलता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस प्रकार के कठिन वातावरण में हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन परखा जाता है।

अभ्यास के उद्देश्य

इस अभ्यास के प्रमुख उद्देश्यों में दल समन्वय को तेज करना, फायरिंग मानकों को मान्य करना और मांग वाले वातावरण में वायु रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करना शामिल था। दल के सदस्यों ने लक्ष्य निगरानी, अधिग्रहण प्रणालियों और मिसाइल तैनाती इकाइयों के बीच निर्बाध समन्वय का प्रदर्शन किया। यह समन्वय प्रभावी वायु रक्षा में एक महत्वपूर्ण कारक है और वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में निर्णायक साबित हो सकता है।

स्ट्रेला-10 प्रणाली की विशेषताएं

स्ट्रेला-10 एक अत्यंत कम दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली है जो कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों जैसे हेलीकॉप्टर, कम उड़ान वाले विमान और मानव रहित हवाई वाहनों का मुकाबला करने के लिए डिजाइन की गई है। यह प्रणाली विशेष रूप से युद्ध क्षेत्र में निकट वायु रक्षा के लिए प्रभावी है, जहां शत्रु विमान और ड्रोन सैनिकों और सैन्य प्रतिष्ठानों के लिए तत्काल खतरा पैदा करते हैं।

मारक क्षमता और सीमा

स्ट्रेला-10 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की संलग्नता सीमा लगभग 6-10 किलोमीटर है। यह सीमा इसे सामरिक स्तर पर प्रभावी बनाती है, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए। इसकी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और गतिशीलता इसे आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुकूल बनाती है।

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युद्धक्षेत्र वायु रक्षा में महत्व

सफल परीक्षण ने भारतीय सेना की युद्धक्षेत्र वायु रक्षा को बढ़ाने की क्षमता को रेखांकित किया और प्रत्यक्ष फायर स्थितियों में प्रणाली की प्रभावशीलता को मान्य किया। आधुनिक युद्ध में, जहां ड्रोन और कम उड़ान वाले विमानों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, ऐसी प्रणालियां सेना की रक्षात्मक क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
यह परीक्षण भारतीय सेना की तकनीकी क्षमता और परिचालन तत्परता का प्रमाण है। पोखरण जैसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में इस प्रकार के सफल परीक्षण देश की रक्षा तैयारियों में विश्वास को मजबूत करते हैं और संभावित खतरों के खिलाफ एक मजबूत निवारक के रूप में कार्य करते हैं।

सपन दास  

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