दीनदयाल अंत्योदय योजना
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने ग्रामीण आय में बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उद्यमिता पर राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए गैर-कृषि आजीविका के अवसरों को बढ़ाने और देश भर में तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने के सरकार के लक्ष्य की दिशा में प्रगति को तेज करने का प्रयास करती है।
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गैर-कृषि ग्रामीण आजीविका पर जोरदीनदयाल अंत्योदय योजना का उद्देश्य विविध आजीविका को बढ़ावा देकर ग्रामीण महिलाओं की आय में स्थायी सुधार लाना है। गैर-कृषि उद्यम एक महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में उभरे हैं जो कृषि की पूरक हैं और आय की असुरक्षा को कम करते हैं। स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम जैसे कार्यक्रमों ने पहले ही प्रशिक्षित जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं द्वारा समर्थित सामुदायिक नेतृत्व वाले उद्यम मॉडल की प्रभावशीलता को सिद्ध किया है।
सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों की भूमिका
प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ता व्यवहार्य उद्यमों की पहचान करने, स्टार्ट-अप का समर्थन करने, उद्यमियों को मार्गदर्शन देने और दीर्घकालिक सहायता प्रदान करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। ये जमीनी स्तर के उत्प्रेरक लखपति दीदी पहल के लिए आवश्यक पैमाने को हासिल करने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस पहल के तहत स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों से वार्षिक रूप से कम से कम एक लाख रुपये कमाने की अपेक्षा की जाती है। इस कार्यबल का विस्तार महत्वाकांक्षी आजीविका लक्ष्यों को पूरा करने के लिए केंद्रीय माना जाता है।
राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान का शुभारंभ
इन प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए, 12 जनवरी 2026 को अतिरिक्त सचिव (ग्रामीण विकास) द्वारा राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में नीति आयोग के सलाहकार, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष तथा बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, आईएफएमआर लीड, भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान और आईआईएम कलकत्ता इनोवेशन पार्क जैसे संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सीईओ भी उपस्थित थे।
लक्ष्य और अपेक्षित प्रभाव
यह अभियान उद्यम संवर्धन में 50,000 सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने और 50 लाख स्वयं सहायता समूह सदस्यों को उद्यमिता विकास प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखता है। ग्रामीण भारत में उद्यम विकास को गहरा करके, इस पहल से स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने, औपचारिक वित्तीय संस्थानों के साथ संबंधों को मजबूत करने और महिला उद्यमियों द्वारा संचालित एक लचीली, समावेशी और आत्मनिर्भर गैर-कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की उम्मीद है।
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महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
यह अभियान न केवल ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त भी बनाएगा। गैर-कृषि क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देकर, यह पहल ग्रामीण परिवारों की आय में विविधता लाने और मौसमी आय की अनिश्चितता को कम करने में सहायक होगी। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल अपने परिवारों बल्कि अपने समुदायों के विकास में भी योगदान दे सकेंगी।
वित्तीय समावेशन और बाजार संपर्क
अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना है। नाबार्ड जैसे संस्थानों की भागीदारी से ग्रामीण उद्यमियों को ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी। साथ ही, बाजार संपर्क को मजबूत करने से ग्रामीण उत्पादों की बिक्री और लाभप्रदता में वृद्धि होगी।
यह राष्ट्रीय अभियान ग्रामीण भारत में महिला नेतृत्व वाली अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल गरीबी उन्मूलन में योगदान देगा बल्कि सामाजिक-आर्थिक समानता को भी बढ़ावा देगा। लखपति दीदी का लक्ष्य केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सम्मान, आत्मविश्वास और सामाजिक स्थिति को ऊंचा उठाने का प्रतीक है।