CEC Controversy : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का विरोध-प्रदर्शन जारी है। इसी सिलसिले में विपक्षी दलों के 10 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने के लिए निकला। राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस सांसद कल्याण वैजिनाथराव काले समेत कई नेताओं ने अपनी बात रखी।
पढ़ें :- INDIA bloc : दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद होने पर भड़का इंडिया ब्लॉक, कहा- इसको डर कहते हैं...
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यह मुद्दा केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नहीं है, बल्कि देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है। विपक्ष शुरू से ही मौलिक अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें हासिल करने की बात उठाता रहा है। खड़गे ने राष्ट्रपति से मुलाकात को लेकर भी अपनी बात रखी। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को अंदर जाने की अनुमति देने के मामले में स्थिति ऐसी है कि 10 सदस्यों के हस्ताक्षर लेकर वे दरवाजे पर ही रहेंगे, जबकि अंदर जाने की अनुमति केवल उन्हीं 10 लोगों को मिलेगी।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इसे डर कहते हैं, इसे कायरता कहते हैं, इसे आतंक कहते हैं। कांग्रेस सांसद कल्याण वैजिनाथराव काले ने वोट चोरी के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि यह मुद्दा सबसे पहले महाराष्ट्र में उठा था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस विषय को उठाया, जिसके बाद देशभर में लोगों ने इसके बारे में देखा और पढ़ा। काले के मुताबिक, इसके बाद ही यह संघर्ष शुरू हुआ।
कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, “हमें उम्मीद है कि सरकार अब इस मामले पर ध्यान देगी। यह सिर्फ ज्ञानेश कुमार का मामला नहीं है; पूरी चुनावी व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। ईवीएम को हटाने और चुनावी प्रक्रिया में देश के लोगों का भरोसा और विश्वास बहाल करने की जरूरत है।” कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि वोट चोरी का सबसे पहला सवाल उठाया गया था और आज भी हम यही कह रहे हैं कि चाहे महाराष्ट्र हो, हरियाणा हो, पश्चिम बंगाल हो या बिहार, जिस तरह से वोट चोरी हुए हैं, उसके लिए ज्ञानेश कुमार ही जिम्मेदार हैं।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि हमने संसद के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल, जिसे आज ‘संविधान सदन’ कहा जाता है, में दो घंटे तक चर्चा की। हमें लगा कि हम देश के लोकतंत्र के एक बहुत ही अहम मौके का हिस्सा बन रहे हैं। हमें लगता है कि लोकतंत्र खतरे में है, क्योंकि मौजूदा अधिकारियों के गलत कामों की वजह से चुनाव आयोग जैसी अहम संवैधानिक संस्था ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है।
पढ़ें :- CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन पर अंतरिम आदेश पारित करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, केंद्र और ECI को भेजा नोटिस
मुख्य चुनाव आयुक्त और बाकी दो चुनाव आयुक्तों ने जिस तरह से काम किया है, उससे उन्होंने अपनी विश्वसनीयता तो खोई ही है, साथ ही भारत के चुनाव आयोग का नाम भी खराब किया है। यह हमारा जरूरी फर्ज है कि हम एकजुट हों, घरों और संसद से बाहर निकलें, सड़कों पर उतरें और देश के लोगों को उस बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण सरकार से होने वाले खतरे के बारे में आगाह करें, जो लोकतांत्रिक नियमों से भटकने पर आमादा है। अब सड़कों पर उतरने का सही समय आ गया है।
बस कुछ ही समय की बात है जब ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा और जाना होगा। ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तो बस पहला कदम है, लेकिन हमारा असली मकसद लोकतंत्र को बहाल करना है। (आईएएनएस)
Disclaimer
इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।
देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें।