Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. ख़बरें जरा हटके
  3. करवाचौथ व्रत का क्या है महत्व और कैसे करें विधि-विधान से पूजा? जानिए

करवाचौथ व्रत का क्या है महत्व और कैसे करें विधि-विधान से पूजा? जानिए

By HO BUREAU 

Updated Date

What is the significance of the Karwa Chauth fast, and how should the worship be performed according to the prescribed rituals?

Karwa Chauth 2026: करवाचौथ हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। इस बार यह पर्व कल यानी 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। करवा चौथ का व्रत श्रद्धा, आस्था और दांपत्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को भगवान गणेश, मां पार्वती, भगवान शिव और कार्तिकेय की पूजा करती हैं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।

पढ़ें :- झारखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला, पॉलीटेकनिक छात्रों की इंटर्नशिप से लेकर स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास तक मुहर

करवाचौथ के दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों का भी विशेष महत्व होता है। महिलाएं सोलह शृंगार करती हैं, नए या पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं। आइए जानते हैं करवाचौथ व्रत का धार्मिक महत्व, पूजा की सामग्री, पूजा-विधि और व्रत से जुड़े जरूरी नियम।

करवाचौथ व्रत का क्या है धार्मिक महत्व?

करवाचौथ का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और पति की लंबी आयु की कामना पूरी होती है। हालांकि, व्रत का फल श्रद्धा और आस्था से जुड़ा धार्मिक विश्वास है।

करवाचौथ में ‘करवा’ का अर्थ मिट्टी के उस पात्र से है, जिसका इस्तेमाल पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए किया जाता है। वहीं, ‘चौथ’ चतुर्थी तिथि को दर्शाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा को विघ्नों को दूर करने वाला माना जाता है। मां पार्वती को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, जबकि भगवान शिव और कार्तिकेय की पूजा भी परंपरा के अनुसार की जाती है।

पढ़ें :- 'भारत का लक्ष्य केवल अपनी जरूरतों को पूरा करना ही नहीं, बल्कि...',भारत मंडपम में बोले PM मोदी

कई परिवारों में करवाचौथ की कथा सुनने और सुनाने की परंपरा है। मान्यता है कि कथा के श्रवण से व्रत का धार्मिक महत्व पूरा होता है। आज के समय में कई महिलाएं अपने पति के साथ-साथ परिवार की सुख-शांति और आपसी प्रेम के लिए भी यह व्रत रखती हैं। कुछ अविवाहित महिलाएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं, हालांकि इसकी परंपराएं परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

इस बार चांद निकलने का समय

इस साल करवाचौथ का पर्व 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। कुछ अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का समय नीचे दिया जा रहा है।

करवाचौथ पर पूजा के लिए किन सामग्रियों की होती है जरूरत?

करवाचौथ की पूजा से पहले आवश्यक सामग्री एक जगह तैयार कर लेनी चाहिए, ताकि पूजा के समय किसी चीज की कमी न हो। पूजा की सामग्री में आमतौर पर ये चीजें शामिल होती हैं:

पूजा सामग्री की सूची स्थानीय परंपराओं और परिवार की रीति के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए पूजा से पहले घर के बड़े-बुजुर्गों से भी जानकारी ली जा सकती है।

पढ़ें :- चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र बना रहा पॉलिसी फ्रेमवर्क

करवाचौथ व्रत की पूजा कैसे करें? जानिए पूरी विधि

  1. सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें

करवाचौथ के दिन कई परिवारों में सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा है। सरगी में फल, सूखे मेवे, मिठाई और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। सरगी के बाद व्रत शुरू किया जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी परंपरा के अनुसार दिनभर भोजन और पानी ग्रहण नहीं करतीं। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर उपवास के नियमों में बदलाव करना या चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

  1. स्नान कर पूजा और व्रत का संकल्प लें

सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिनभर मन को शांत रखें और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-पाठ करें। कई महिलाएं इस दिन पारंपरिक लाल, गुलाबी या अन्य शुभ रंगों के वस्त्र पहनती हैं और सोलह शृंगार करती हैं।

  1. शाम को पूजा की तैयारी करें

शाम के समय पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश, भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके साथ ही करवाचौथ का पोस्टर या फोटो जो भी हो उसे स्थापित करें। पूजा की थाली सजाएं, करवे में जल भरें और दीपक जलाएं। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल और प्रसाद अर्पित करते हुए देवी-देवताओं की पूजा करें। पूजा के दौरान अपने परिवार की सुख-शांति और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करें।

  1. करवाचौथ की कथा सुनें

पूजा के दौरान करवाचौथ व्रत की कथा सुनने की परंपरा है। महिलाएं एकत्र होकर कथा सुनती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करती हैं। कथा के बाद भगवान से सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। कई स्थानों पर करवा बदलने या एक-दूसरे को करवा देने की रस्म भी निभाई जाती है।

  1. चंद्रमा को अर्घ्य देकर करें व्रत का पारण

करवाचौथ के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। चंद्रोदय के बाद महिलाएं छलनी से चंद्रमा को देखती हैं और जल अर्पित कर अर्घ्य देती हैं। कई परिवारों में इसके बाद पति को छलनी से देखने और पति के हाथ से जल ग्रहण करने की परंपरा है। इसके पश्चात भगवान का स्मरण करके व्रत खोला जाता है और भोजन ग्रहण किया जाता है।

पढ़ें :- सोने की कीमतों में मामूली बदलाव, चांदी करीब दो हजार रुपए हुई सस्ती

चंद्रमा निकलने का समय शहर और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय चंद्रोदय समय की जानकारी अवश्य देख लें।

करवाचौथ व्रत में किन बातों का रखें ध्यान?

करवाचौथ के दिन पूजा और व्रत के दौरान स्वच्छता, श्रद्धा और पारिवारिक परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए। पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखें और चंद्रमा के दर्शन के लिए स्थानीय समय की जानकारी लें। व्रत को लेकर अनावश्यक दबाव न बनाएं। गर्भवती महिलाओं, मधुमेह से पीड़ित लोगों, नियमित दवा लेने वालों या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को निर्जला उपवास करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। कमजोरी, चक्कर या अस्वस्थता महसूस होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है।

प्रेम, आस्था और दांपत्य जीवन का प्रतीक है करवाचौथ

करवाचौथ केवल उपवास और पूजा तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और आपसी सहयोग का संदेश भी देता है। समय के साथ इस पर्व को मनाने के तरीकों में बदलाव आया है। आज कई पति भी अपनी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं और इस परंपरा में सहभागी बनते हैं। इस तरह करवाचौथ पारिवारिक एकता, भावनात्मक जुड़ाव और एक-दूसरे के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर बन गया है।

Satyam Kushwah

Disclaimer

पढ़ें :- न्यूजीलैंड के खिलाफ अभिषेक ने 20 बाउंड्री के साथ बनाए 113 रन, रिकॉर्ड्स की झड़ी

इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें। 

 

 

 

Advertisement