UPI : जिम्बाब्वे रियल-टाइम पेमेंट के लिए एक साझा घरेलू सिस्टम के तौर पर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की टेक्नोलॉजी का लाइसेंस लेने के लिए एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) के साथ बातचीत कर रहा है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। एनआईपीएल, यूपीआई का संचालन करने वाली सरकारी कंपनी भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अंतरराष्ट्रीय इकाई है और इसने दूसरे देशों में यूपीआई जैसा इन्फ्रास्ट्रक्चर पहुंचाया है।
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‘इंडिया नैरेटिव’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह का घरेलू सिस्टम बैंकों, मोबाइल-मनी ऑपरेटरों और फिनटेक कंपनियों को एक ही पब्लिक लेयर पर रियल-टाइम में ट्रांसफर क्लियर करने में मदद करेगा। जिम्बाब्वे के रिजर्व बैंक के गवर्नर जॉन मुशायावान्हु ने कहा कि इस कदम से लागत कम हो सकती है, ट्रांसफर तेज हो सकते हैं और छोटे घरेलू लेन-देन के लिए कार्ड के बजाय अकाउंट-टू-अकाउंट पेमेंट का विकल्प मिल सकता है।
मुशायावान्हु ने कहा कि इसके बाद सीमा-पार इस्तेमाल और रेमिटेंस (विदेश से पैसे भेजने) की सुविधा भी शुरू हो सकती है और एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) के साथ बातचीत 31 अक्टूबर तक पूरी हो सकती है। जिम्बाब्वे में पहले से ही बड़ी संख्या में डिजिटल ट्रांजैक्शन होते हैं, लेकिन वहां कम लागत वाला कोई कॉमन पेमेंट सिस्टम नहीं है।
जिम्बाब्वे के नेशनल सिस्टम ने 2025 की चौथी तिमाही में 23.8 करोड़ इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन किए,इनमें से लगभग 87 प्रतिशत ट्रांजैक्शन मोबाइल मनी के जरिए हुए और एक्टिव मोबाइल-फाइनेंशियल-सर्विस यूजर्स की संख्या लगभग 1.1 करोड़ थी। रिपोर्ट में बताया गया, “2025 में विदेशों में रहने वाले नागरिकों से आने वाली राशि बढ़कर 2.45 अरब डॉलर हो गई, जो 2024 में 2.15 अरब डॉलर थी। 2025 की शुरुआत में आए कुल पैसे में से ब्रिटेन और दक्षिण अफ़्रीका, दोनों का हिस्सा एक-चौथाई से थोड़ा ज्यादा था। ये डॉलर परिवारों की आय और विदेशी मुद्रा का स्रोत हैं, और माइनिंग के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।”
रिपोर्ट में कहा गया है, “वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि 2025 में सब-सहारा अफ्रीका में 200 डॉलर भेजने की औसत लागत लगभग 8 प्रतिशत रही है, जबकि ग्लोबल औसत लगभग 6.5 प्रतिशत और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (एसडीजी) का लक्ष्य 3 प्रतिशत है।” रिपोर्ट के अनुसार, सदर्न अफ्रीकन डेवलपमेंट कम्युनिटी (एसएडीसी) रूट से पैसे भेजने की लागत और भी ज्यादा है। इसमें यह भी कहा गया है कि बिचौलियों के कारण जो पैसा बीच में ही निकल जाता है, वह असल में अफ्रीकी लोगों के भोजन और वर्किंग कैपिटल का नुकसान है।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि घाना, युगांडा, रवांडा और मोजाम्बिक ने एनपीसीआई के साथ मिलकर काम करने में पहले ही दिलचस्पी दिखाई है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि जो देश इसमें सबसे पहले कदम उठाएंगे, वे ऐसे स्टैंडर्ड तय करेंगे, जिन्हें बाकी देश अपना सकेंगे। (आईएएनएस)
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