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तुर्की सेब का भारत में आयात क्यों हो बंद? किसानों की पुकार और आत्मनिर्भरता की मांग

भारत में तुर्की सेब के आयात ने देशी किसानों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। सस्ता विदेशी माल भारतीय सेब की कीमतों को गिरा रहा है और स्थानीय उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह लेख किसानों की मांग, आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम और तुर्की सेब पर प्रतिबंध की ज़रूरत को उजागर करता है।

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भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां सेब उत्पादन विशेषकर हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर होता है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में तुर्की से आयातित सेबों ने भारतीय बाजार में अपनी पकड़ बना ली है। विदेशी सेब की कम कीमत और भारी मात्रा में आयात से भारतीय सेब किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

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विदेशी सेब बनाम देशी मेहनत

तुर्की सेब की कीमतें भारतीय बाजार में कम होती हैं क्योंकि उन्हें भारी सब्सिडी और सरकार की मदद से उगाया जाता है। वहीं भारतीय किसान प्राकृतिक मौसम, मजदूरी और उत्पादन लागत की मार झेलते हैं। जब वही मेहनत से उपजा सेब बाजार में तुर्की सेब से टकराता है, तो देशी सेब की कीमतें गिर जाती हैं और किसानों को घाटा उठाना पड़ता है।

 

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स्वदेशी किसानों की मांग – “तुर्की सेब बंद हो”

हाल ही में कई किसान संगठनों और राज्यों के फल उत्पादक संघों ने केंद्र सरकार से तुर्की सेब के आयात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि भारत को आत्मनिर्भर बनाना है तो विदेशी फलों का आयात कम करना ही होगा। ‘मेक इन इंडिया’ की तरह ‘ग्रोन इन इंडिया’ अभियान चलाकर स्थानीय उत्पादकों को समर्थन दिया जाना चाहिए।

 

कश्मीर और हिमाचल के किसानों की हालत

कश्मीर और हिमाचल में सेब की खेती मुख्य आजीविका है। यहां के हजारों किसान इसी पर निर्भर हैं। जब बाज़ार में सस्ते तुर्की सेब आते हैं, तो व्यापारी देशी सेब की कीमतें कम कर देते हैं। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है। घाटे में काम करना उन्हें मजबूरी बन चुकी है। अगर यही हाल रहा तो सेब की खेती बंद करनी पड़ेगी, जो रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित करेगा।

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आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

भारत सरकार ने आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया है। लेकिन आत्मनिर्भरता केवल उद्योगों में नहीं, खेती में भी ज़रूरी है। अगर हम अपने किसानों को प्रोत्साहन नहीं देंगे और विदेशी माल को प्राथमिकता देंगे, तो यह न केवल हमारी कृषि व्यवस्था को कमजोर करेगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर डालेगा।

 

आयात नीति में बदलाव की ज़रूरत

आज ज़रूरत है कि सरकार भारत के फल उत्पादकों की सुनवाई करे और आयात नीति में बदलाव करे। तुर्की सेब जैसे उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाकर या अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगाकर देशी उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए। इससे न केवल किसान सशक्त होंगे, बल्कि ‘लोकल के लिए वोकल’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।

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ग्राहकों की भूमिका भी अहम

भारतीय उपभोक्ताओं को भी चाहिए कि वे देशी उत्पादों को प्राथमिकता दें। अगर हम अपने ही देश के फलों को खरीदेंगे, तो यह सीधा समर्थन हमारे किसानों को मिलेगा। थोड़े महंगे सही, लेकिन देशी सेब गुणवत्ता में कहीं बेहतर होते हैं और हमारे किसानों की मेहनत का प्रतिफल होते हैं।

 

निष्कर्ष

तुर्की सेब का भारत में आयात न केवल किसानों के लिए संकट बना है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की राह में भी बाधा है। आज समय है कि हम मिलकर स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें, सरकार आयात पर नियंत्रण लगाए और हम सब मिलकर देश की कृषि रीढ़ को मजबूत करें।

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