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क्या 2026 बनेगा ‘लॉकडाउन 2.0’ का साल?

By HO BUREAU 

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NIPAH Virus

NIPAH वायरस: कोरोना के बाद अगला डर?

एक अदृश्य खतरा जो खामोशी से फैलता है:

NIPAH वायरस कोई आम संक्रमण नहीं है। यह एक अत्यधिक घातक ज़ूनोटिक वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है और इंसानों के बीच भी संक्रमण की क्षमता रखता है। यह वायरस सबसे पहले फल खाने वाली चमगादड़ों से जुड़ा पाया गया, और वहीं से यह मानव जीवन में प्रवेश करता है।

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सबसे डरावनी बात यह है कि यह वायरस सिर्फ़ सांस की बीमारी नहीं करता, बल्कि सीधे दिमाग़ (ब्रेन) पर हमला करता है — जिससे यह साधारण संक्रमण से कहीं ज़्यादा खतरनाक बन जाता है।

लक्षण: साधारण बुखार से ब्रेन अटैक तक

NIPAH संक्रमण की शुरुआत आम बीमारी जैसी लग सकती है, लेकिन यह तेज़ी से गंभीर रूप ले लेता है।
इसके प्रमुख लक्षण होते हैं:

यही कारण है कि NIPAH को दुनिया के सबसे घातक वायरसों में गिना जाता है।

भारत में NIPAH: डर का इतिहास और नया खतरा

भारत में NIPAH कोई नया नाम नहीं है। केरल वर्षों से इसका सबसे संवेदनशील क्षेत्र रहा है, जहाँ कई बार इसके मामले सामने आ चुके हैं। अब 2026 में, पश्चिम बंगाल में इसके नए मामलों ने चिंता को फिर से ज़िंदा कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने कई लोगों को क्वारंटाइन किया है, जिनमें स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं जो यह दिखाता है कि यह वायरस अस्पतालों तक को असुरक्षित बना सकता है।

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संक्रमण कैसे फैलता है?

NIPAH वायरस फैलने के मुख्य रास्ते:

यह वायरस हवा में COVID जितना तेज़ नहीं फैलता, लेकिन क्लोज़ कॉन्टैक्ट में बेहद खतरनाक होता है।

इलाज और वैक्सीन: सबसे बड़ी चिंता

सबसे डरावनी सच्चाई यही है कि:

इलाज केवल लक्षणों के आधार पर किया जाता है (supportive treatment), यानी मरीज को बचाने की कोशिश, इलाज नहीं।

बचाव ही सुरक्षा है

जब इलाज नहीं है, तो बचाव ही हथियार है:

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क्या 2026 बनेगा अगला महामारी वर्ष?

NIPAH अभी COVID जैसी वैश्विक महामारी नहीं है। लेकिन इसका मौत का प्रतिशत बहुत ज़्यादा है, और यही इसे ज़्यादा खतरनाक बनाता है।

फिलहाल लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन अगर संक्रमण फैलाव बढ़ा, तो सख़्त प्रतिबंधों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सपन दास 

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