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मार्च 2026 में एलपीजी की किल्लत से देश परेशान: गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें, आखिर क्यों हो रही है यह समस्या?

सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ऊर्जा आपूर्ति की अस्थिरता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। हाल के महीनों में वैश्विक शिपिंग में देरी और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है।

By HO BUREAU 

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नई दिल्ली, मार्च 2026। देशभर में इन दिनों रसोई गैस यानी एलपीजी की कमी ने आम लोगों की रसोई का बजट और धैर्य दोनों बिगाड़ दिए हैं। कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों को सिलेंडर मिलने में कई-कई दिन लग रहे हैं। अचानक आई इस किल्लत ने लाखों परिवारों को चिंता में डाल दिया है।

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आखिर क्यों हो रही है एलपीजी की कमी?

विशेषज्ञों के मुताबिक एलपीजी संकट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।

सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ऊर्जा आपूर्ति की अस्थिरता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। हाल के महीनों में वैश्विक शिपिंग में देरी और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है।

दूसरा कारण घरेलू मांग में अचानक बढ़ोतरी बताया जा रहा है। सर्दियों के बाद शादी-विवाह और त्योहारों के मौसम में एलपीजी की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसी समय कई रिफाइनरियों में रखरखाव कार्य चलने के कारण उत्पादन भी कुछ समय के लिए धीमा हो गया।

तीसरा कारण लॉजिस्टिक समस्याएं हैं। कई जगहों पर ट्रांसपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में बाधाएं आने से गैस एजेंसियों तक सिलेंडर समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।

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आम लोगों की बढ़ी परेशानी

कई शहरों और कस्बों में उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुक कराने के बाद 7 से 10 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर गैस एजेंसियों ने सीमित वितरण भी शुरू कर दिया है ताकि अधिक से अधिक लोगों तक गैस पहुंच सके।

घरेलू महिलाओं का कहना है कि रसोई चलाना मुश्किल हो गया है। कई परिवारों को अस्थायी रूप से इंडक्शन या इलेक्ट्रिक कुकिंग का सहारा लेना पड़ रहा है।

सरकार क्या कह रही है?

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह स्थिति अस्थायी है और जल्द ही आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। आयात बढ़ाने और वितरण प्रणाली को तेज करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। तेल कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्टॉक बढ़ाकर बाजार में आपूर्ति सुनिश्चित करें।

क्या आगे भी बनी रहेगी यह समस्या?

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के लिए एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर रखना चुनौतीपूर्ण होता है। अगर वैश्विक बाजार में अस्थिरता जारी रहती है तो समय-समय पर ऐसी स्थितियां बन सकती हैं।

हालांकि सरकार दीर्घकालिक समाधान के रूप में एलपीजी भंडारण क्षमता बढ़ाने और घरेलू उत्पादन मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

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कब तक खत्म होगी किल्लत?

उद्योग सूत्रों के अनुसार अगले कुछ हफ्तों में आयातित गैस की नई खेप देश में पहुंचने वाली है। उम्मीद है कि मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत तक अधिकांश क्षेत्रों में आपूर्ति सामान्य हो जाएगी।

फिलहाल उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे घबराकर अतिरिक्त सिलेंडर जमा न करें, क्योंकि इससे कृत्रिम कमी और बढ़ सकती है।

रसोई की आग ठंडी न पड़े यही देश की करोड़ों गृहिणियों की सबसे बड़ी उम्मीद है, और अब सबकी नजर सरकार और तेल कंपनियों की अगली चाल पर टिकी हुई है।

✍️सपन दास  

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