Delhi High Court : कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रंका की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई की. हाईकोर्ट ने वकीलों को सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता स्पेशल एग़्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने होने वाली सुनवाई का इंतज़ार करे. अगर न्यायिक हिरासत बढ़ती है तो रिट याचिका दायर करने के बजाय सेशन कोर्ट का रुख करें. सुझाव मानते हुए दास और रंका के वकीलों ने हाईकोर्ट से जमानत की याचिका वापस ली.
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हाईकोर्ट ने कहा कि बॉन्ड का उल्लंघन किया गया. बॉन्ड की शर्तों को मानने के लिए कहना गैरकानूनी कैसे हो सकता है. अदालत ने दोनों की उम्र पूछी और कहा कि दोनों GEN Z नहीं हैं. स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट SEM ने उनकी हिरासत की अवधि बढ़ाने का आदेश दिया था. इसी के खिलाफ सौरव और आशुतोष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन जब मजिस्ट्रेट के सामने शांति भंग होने की आशंका का सवाल आता है तो यह देखना भी जरूरी हो जाता है कि प्रदर्शन करने वाले कौन हैं, उनकी मंशा क्या है और वे जिंदगी में क्या करते हैं.
यह है मामला
CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर – मंतर में प्रदर्शन का ऐलान किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस की तरफ से परमिशन नहीं दी गई. इसी बीच कोर्ट ने आदेश दिया था कि सरकार कोई प्रदर्शन साइड नोटिफाइड करे. दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन करने के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए थे. इसमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल है.
जंतर – मंतर को प्रदर्शन साइड से हटा दिया गया था. सीजेपी जंतर – मंतर पर प्रदर्शन के लिए अड़ी हुई थी. सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर को पुलिस से बचते हुए जंतर – मंतर पहुंच गए थे. उसी दिन पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया था.
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