1. हिन्दी समाचार
  2. देश
  3. दिल्ली हाईकोर्ट में CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका SEM कोर्ट के आदेश को देंगे चुनौती

दिल्ली हाईकोर्ट में CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका SEM कोर्ट के आदेश को देंगे चुनौती

Delhi High Court : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका अपनी रिहाई की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं।

By HO BUREAU 

Updated Date

Delhi High Court : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका अपनी रिहाई की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं। वे जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश के मामले में अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाने वाले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट के आदेश को चुनौती देंगे।

पढ़ें :- 38 देशों के साथ फ्री ट्रेड समझौते ऐतिहासिक उपलब्धि : राजनाथ सिंह

यह कदम एसईएम कोर्ट द्वारा दोनों की न्यायिक हिरासत को 21 अक्टूबर तक बढ़ाए जाने के एक दिन बाद उठाया गया है। कोर्ट ने कहा कि उनका बर्ताव कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं दिखाता और इससे पता चलता है कि वे प्रतिबंधित इलाकों में विरोध-प्रदर्शन करने के आदी हैं।

सोमवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद, एसईएम ऋतु राज ने मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में इन दोनों सीजेपी नेताओं को 21 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अपने आदेश में, एसईएम कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने रिकॉर्ड पर ऐसे ठोस सबूत पेश किए हैं, जिनसे शांति भंग होने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई गई है।

कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि इन दोनों नेताओं ने 11 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम जिले के एसईएम के सामने दिए गए मुचलके (बॉन्ड) की शर्तों का उल्लंघन किया है और इस मामले में शांति भंग की है। कोर्ट ने कहा कि उनके इस आश्वासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि वे दोबारा ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उनका पिछला बर्ताव और जांच अधिकारी द्वारा पेश किए गए सबूत कुछ और ही बताते हैं।

13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर निजी परिसर से प्रवेश करने और पुलिसकर्मियों को उनकी ड्यूटी करने से रोकने के आरोप में 14 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें सौरव दास और रांका के साथ-साथ पार्टी सदस्य अजिंक्य शिंदे भी शामिल थे। सीजेपी सदस्य मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) में अनियमितताओं के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे भी लगाए थे।

पढ़ें :- पंजाब में नशा-विरोधी कार्यकर्ता की हत्या के मामले की जांच करेगी सीबीआई : अमित शाह

दिल्ली पुलिस ने उनकी हिरासत जारी रखने को सही ठहराते हुए कहा कि उन्होंने बार-बार कानून तोड़ा है। पुलिस को आशंका है कि अगर उन्हें रिहा किया गया तो वे फिर से कानून तोड़ सकते हैं और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए उकसा सकते हैं।

जांच के बाद एसईएम कोर्ट ने इन दोनों नेताओं की ओर से दी गई जमानत को भी अमान्य करार दिया। कोर्ट ने कहा कि पहचान दस्तावेजों में विसंगतियां थीं और जमानत देने वाले लोग उन व्यक्तियों के बारे में बुनियादी जानकारी भी नहीं दे पाए, जिनके लिए उन्होंने जमानत ली थी। कोर्ट ने उन्हें नई जमानत (श्योरिटी) पेश करने का निर्देश दिया है।

(आईएएनएस)

Disclaimer

इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

पढ़ें :- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पुरुष प्रधान और संविधान विरोधी संगठन : राहुल गांधी

देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें। 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook, YouTube और Twitter पर फॉलो करे...
Booking.com
Booking.com