Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. एस्ट्रोलोजी
  3. आज है देवउठनी एकादशी? जानें पूजा मुहूर्त, पारण समय और महत्व

आज है देवउठनी एकादशी? जानें पूजा मुहूर्त, पारण समय और महत्व

By इंडिया वॉइस 

Updated Date

आज यानी 4 नवंबर, 2022 को देवउठनी एकादशी है,कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है. यह एकादशी दीपावली के बाद आती है. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं, इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है.यह सभी 24 एकादशी में सबसे शुभ और मंगलकारी मानी जाती है.जगत के पालनहार के जागते ही 4 महीनों से रुके हुए सभी तरह के मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे.

पढ़ें :- 21 जून 2026 स्वास्थ्य राशिफल: सभी 12 राशियों के हेल्थ टिप्स

देवउठनी एकादशी शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारंभ- शाम 7 बजकर 30 मिनट से (3 नवंबर, 2022)
एकादशी तिथि समाप्त- शाम 6 बजकर 8 मिनट तक ( 4 नवंबर, 2022)
देवउठनी एकादशी की तारीख- 5 नवंबर, 2022

देवउठनी एकादशी पारण समय

देवउठनी एकादशी व्रत का पारण तिथि : 05 नवंबर, शनिवार
पारण समय: प्रातः 06:36 मिनट से प्रातः 08:47 मिनट के मध्य
द्वादशी तिथि समाप्त: सायं 05:06 मिनट पर

पढ़ें :- 20 जून 2026 स्वास्थ्य राशिफल: सभी 12 राशियों के हेल्थ टिप्स

प्रबोधिनी एकादशी का पूजन

प्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन और उनसे जागने का आह्वान किया जाता है. इस दिन होने वाले धार्मिक कर्म इस प्रकार हैं-

इस दिन प्रातःकाल उठकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए और भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए.

घर की सफाई के बाद स्नान आदि से निवृत्त होकर आंगन में भगवान विष्णु के चरणों की आकृति बनाना चाहिए.

एक ओखली में गेरू से चित्र बनाकर फल,मिठाई,बेर,सिंघाड़े,ऋतुफल और गन्ना उस स्थान पर रखकर उसे डलिया से ढांक देना चाहिए.

पढ़ें :- 19 जून 2026 स्वास्थ्य राशिफल: सभी 12 राशियों के हेल्थ टिप्स

इस दिन रात्रि में घरों के बाहर और पूजा स्थल पर दीये जलाना चाहिए.

रात्रि के समय परिवार के सभी सदस्य को भगवान विष्णु समेत सभी देवी-देवताओं का पूजन करना चाहिए.

शुरू हो जाएंगे शुभ कार्य

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी या हरिशयनी एकादशी कहा जाता है. माना जाता है इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, उनके शयन करने के कारण ही इन चार महीनों में मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं, किंतु देवोत्थान एकादशी के दिन श्री विष्णु हरि के जागने के बाद से बैंड-बाजे बजने लगते हैं, विवाह आदि कर्म होने लगते हैं

Advertisement