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धुरंधर 2 के क्लाइमैक्स में दिखे ऑटो चालक हरजीत ने अपनी फिल्म नहीं देखी- वजह जानकर दिल भर आएगा

धुरंधर 2 इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ रही है। करोड़ों लोग इसे देख चुके हैं। लेकिन इस फिल्म में खुद नज़र आने वाले एक शख्स ने अब तक अपना वह दृश्य नहीं देखा और इसकी वजह बेहद दिल को छू लेने वाली है।

By HO BUREAU 

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रणवीर के साथ परदे पर, लेकिन टिकट अफोर्ड नहीं

धुरंधर 2 इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ रही है। करोड़ों लोग इसे देख चुके हैं। लेकिन इस फिल्म में खुद नज़र आने वाले एक शख्स ने अब तक अपना वह दृश्य नहीं देखा — और इसकी वजह बेहद दिल को छू लेने वाली है। फिल्म के क्लाइमैक्स में रणवीर सिंह के साथ दिखने वाले ऑटो चालक हरजीत अभी तक सिनेमाघर नहीं जा पाए क्योंकि एक टिकट की कीमत 500 रुपये है। पांच सदस्यों के परिवार के साथ फिल्म देखने का मतलब है ढाई हज़ार रुपये जो उनकी एक महीने की बचत के बराबर है।

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फिल्म में क्या था हरजीत का किरदार?

फिल्म की कहानी में रणवीर सिंह का किरदार जसकीरत उर्फ हमज़ा पाकिस्तान में वर्षों बिताने के बाद अपने गृहनगर पठानकोट लौटता है। अपने घर जाने के लिए वह एक ऑटो लेता है और उस ऑटो को चलाने वाले असली शख्स हरजीत हैं। यह कोई बड़ा बोला जाने वाला किरदार नहीं था, लेकिन फिल्म के सबसे भावनात्मक दृश्यों में से एक में उनकी मौजूदगी है।

आम लोगों को मिला परदे पर मौका

यह पहली बार नहीं है जब धुरंधर 2 की टीम ने किसी आम इंसान को फिल्म में जगह दी। एक और दिलचस्प किस्सा सामने आया है पंजाब के एक सरकारी डॉक्टर जिन्होंने शूटिंग के दौरान अर्जुन रामपाल का इलाज किया, उन्हें भी फिल्म में एक छोटी भूमिका मिली। इस तरह की पहल फिल्म को आम जनता से सीधे जोड़ती है।

500 रुपये का टिकट और एक आम आदमी की ज़िंदगी

हरजीत की यह कहानी एक बड़े सवाल को भी सामने रखती है। जब मल्टीप्लेक्स में टिकट की कीमतें 400 से 700 रुपये तक पहुंच जाती हैं, तो एक आम मेहनतकश परिवार के लिए सिनेमा एक विलासिता बन जाती है। हरजीत ने खुद फिल्म में काम किया, लेकिन उसे देखना उनकी पहुंच से बाहर है यह विरोधाभास समाज की आर्थिक असमानता का आईना है।

निष्कर्ष

हरजीत की कहानी धुरंधर 2 की चकाचौंध के पीछे एक ज़मीनी सच्चाई उजागर करती है। एक तरफ फिल्म सैकड़ों करोड़ कमा रही है, दूसरी तरफ उसी फिल्म में दिखने वाला एक इंसान टिकट का इंतज़ाम नहीं कर पा रहा। यह सिर्फ एक ऑटो चालक की कहानी नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की कहानी है जिनके लिए सिनेमाघर का दरवाज़ा अब भी बंद है।

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✍️सपन दास

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