UP News : केंद्र सरकार ने देशभर में शत्रु संपत्तियों (Enemy Properties) को अवैध कब्जेदारों से खाली कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 7 अगस्त 2026 को निर्देश जारी कर संबंधित अधिकारियों को ऐसी संपत्तियों को 15 दिनों के भीतर खाली कराने को कहा है। तय अवधि में कब्जा नहीं हटाने वालों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। अब जिला प्रशासन के सामने दशकों पुराने कब्जों को हटाने और इन संपत्तियों को सरकार के नियंत्रण में लेने की बड़ी चुनौती है।
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यूपी में करीब 5,600 शत्रु संपत्तियां
उत्तर प्रदेश में करीब 5,600 शत्रु संपत्तियां बताई जाती हैं। इनमें से लगभग 60 फीसदी संपत्तियों पर अवैध कब्जे होने की बात सामने आई है। सरकार अब इन संपत्तियों को कब्जामुक्त कराने के बाद नियमानुसार उनका निस्तारण करने की तैयारी में है।
किरायेदारों या लीजधारकों के अनुबंध समाप्त होने के बाद संपत्तियों को अपने कब्जे में लेकर नीलामी के जरिए राजस्व जुटाने की योजना है। सरकार का मानना है कि इन संपत्तियों से मौजूदा समय में मिलने वाला किराया उनकी वास्तविक बाजार कीमत के मुकाबले बेहद कम है।
हलवासिया मार्केट में 50 साल से रह रहे परिवार
लखनऊ का मशहूर हलवासिया मार्केट इसका बड़ा उदाहरण है। यहां कुछ परिवार कई दशकों से रह रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, इस संपत्ति से सरकार को महज करीब 700 रुपये प्रतिमाह किराया मिलता है। हलवासिया मार्केट के 73 वर्षीय किरायेदार डॉ. सतीश अग्रवाल का कहना है कि उनका परिवार वर्ष 1950 से यहां रह रहा है। उनका सवाल है कि बुढ़ापे में वे लोग कहां जाएंगे।
डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, यदि सरकार उन्हें वहां से हटाती है तो उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में भी सोचना चाहिए। सरकार की नजर अरबों की संपत्तियों पर शत्रु संपत्तियों में उत्तर प्रदेश की कई बेहद कीमती संपत्तियां शामिल हैं। इनमें राजा महमूदाबाद की संपत्तियां सबसे चर्चित हैं। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य अरबों रुपये में बताया जाता है।
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कई जिलों में सरकारी कार्यालय भी ऐसी संपत्तियों पर संचालित हो रहे हैं। लखीमपुर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय और सीतापुर में जिलाधिकारी कार्यालय से जुड़ी संपत्तियां भी राजा महमूदाबाद की संपत्तियों में शामिल बताई जाती हैं। ऐसे में सरकार के लिए इन संपत्तियों को खाली कराकर उनका व्यावसायिक इस्तेमाल या नीलामी करना बड़ा राजस्व स्रोत बन सकता है।
30 साल से चल रही है संपत्तियों को कब्जामुक्त कराने की कोशिश
शत्रु संपत्तियों को कब्जामुक्त कराने की कोशिश कोई नई नहीं है। केंद्र सरकार पिछले करीब तीन दशक से इन संपत्तियों पर अपने अधिकार को लेकर कार्रवाई करती रही है। राजा महमूदाबाद की संपत्तियों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। ऐसे में दशकों से रह रहे किरायेदारों और कब्जेदारों को हटाना जिला प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा। कई मामलों में संपत्तियों पर लंबे समय से लोग रह रहे हैं और किराया भी देते रहे हैं। इसलिए प्रशासन को कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ मानवीय और पुनर्वास से जुड़े सवालों का भी सामना करना पड़ सकता है।
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क्या होती है शत्रु संपत्ति?
शत्रु संपत्ति (Enemy Property) उन संपत्तियों को कहा जाता है, जो ऐसे लोगों की भारत में रह गई थीं, जिन्होंने भारत-चीन युद्ध 1962 या भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965 और 1971 के दौर में भारत छोड़कर चीन या पाकिस्तान की नागरिकता ले ली थी।
शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के तहत ऐसी संपत्तियों को केंद्र सरकार के नियंत्रण में रखा गया। इन संपत्तियों के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया के पास होती है। इन संपत्तियों से मिलने वाला किराया सरकार के खाते में जाता है और संपत्तियों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी कस्टोडियन की होती है।
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अब आगे क्या होगा?
गृह मंत्रालय के ताजा निर्देश के बाद संबंधित जिलों में शत्रु संपत्तियों की पहचान और कब्जे की स्थिति की समीक्षा तेज होने की संभावना है। प्रशासन पहले कब्जेदारों को संपत्ति खाली करने के लिए निर्धारित समय देगा। समयसीमा में कब्जा नहीं हटाने पर नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। हालांकि, जिन संपत्तियों पर लोग कई दशकों से रह रहे हैं, उनके मामलों में कानूनी विवाद और अदालतों में चुनौती की संभावना भी बनी हुई है। ऐसे में 15 दिनों के भीतर शत्रु संपत्तियों को खाली कराने का गृह मंत्रालय का निर्देश उत्तर प्रदेश के जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी प्रशासनिक और कानूनी परीक्षा साबित हो सकता है।
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