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पुरानी कार को इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) में कैसे बदलें: एक किफायती और पर्यावरण-हितैषी विकल्प

आज के समय में पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतों तथा प्रदूषण की समस्या को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग तेजी से बढ़ रही है। लेकिन नई इलेक्ट्रिक कार खरीदना हर किसी के लिए आसान नहीं होता।

By HO BUREAU 

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आज के समय में पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतों तथा प्रदूषण की समस्या को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग तेजी से बढ़ रही है। लेकिन नई इलेक्ट्रिक कार खरीदना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में कई लोग अपनी पुरानी या कबाड़ हो चुकी कार को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने का विकल्प चुन रहे हैं। यह न केवल किफायती है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर कदम माना जाता है।

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पुरानी कार को EV में बदलने की प्रक्रिया को इलेक्ट्रिक कन्वर्ज़न कहा जाता है। इस प्रक्रिया में कार के पेट्रोल या डीज़ल इंजन को हटाकर उसकी जगह इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी पैक, कंट्रोलर और अन्य आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाए जाते हैं। सबसे पहले कार का इंजन, फ्यूल टैंक और एग्जॉस्ट सिस्टम निकाल दिया जाता है। इसके बाद कार के चेसिस और ट्रांसमिशन की जांच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह इलेक्ट्रिक सेटअप को संभाल सकता है या नहीं।

इसके बाद इलेक्ट्रिक मोटर को गियरबॉक्स से जोड़ा जाता है और बैटरी पैक को कार के सुरक्षित हिस्सों में लगाया जाता है, आमतौर पर बूट या बोनट के नीचे। बैटरी ही EV की जान होती है, इसलिए इसमें लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग किया जाता है, जो लंबी दूरी और बेहतर प्रदर्शन देती है।

भारत में इस तरह के कन्वर्ज़न को कानूनी रूप से मान्यता देने के लिए सरकार ने कुछ नियम तय किए हैं। इलेक्ट्रिक कन्वर्ज़न के बाद वाहन को पुनः रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है और इसे प्रमाणित करने के लिए Automotive Research Association of India जैसी अधिकृत एजेंसी से अनुमोदन लेना पड़ता है। इसके बिना वाहन को सड़क पर चलाना अवैध माना जा सकता है।

कई कंपनियाँ अब पुरानी कारों को EV में बदलने की सेवा भी देने लगी हैं। भारत में कुछ स्टार्टअप और ऑटोमोबाइल कंपनियाँ जैसे Tata Motors से जुड़े तकनीकी साझेदार और निजी कन्वर्ज़न किट निर्माता इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर Tesla जैसी कंपनियों ने EV टेक्नोलॉजी को लोकप्रिय बनाया, जिससे लोगों का रुझान इस दिशा में बढ़ा है।

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खर्च की बात करें तो एक सामान्य कार को इलेक्ट्रिक में बदलने का खर्च लगभग 3 से 6 लाख रुपये तक आ सकता है, जो नई इलेक्ट्रिक कार की कीमत से काफी कम होता है। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहन में मेंटेनेंस कम होता है और ईंधन पर खर्च लगभग खत्म हो जाता है, जिससे लंबी अवधि में यह निवेश फायदेमंद साबित होता है।

इस प्रकार, पुरानी कार को EV में बदलना न केवल पैसे बचाने का तरीका है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि सही तकनीकी प्रक्रिया और सरकारी नियमों का पालन किया जाए, तो यह विकल्प भविष्य की स्मार्ट और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बन सकता है।

✍️सपन दास

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