Supreme Court : चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दलों ने विरोध तेज कर दिया है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की जानकारी दी। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए मामले में न्यायालय से हस्तक्षेप करने की मांग की। वहीं, मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने भी कथित वोट चोरी के आरोप दोहराए।
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समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि विपक्ष के सभी नेताओं ने आज शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। अखिलेश यादव, राहुल गांधी और पूरा इंडिया गठबंधन लोकतंत्र में उपलब्ध हर संभव रास्ते को अपनाकर चुनाव आयोग की कथित बेईमानी को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। लोकतंत्र, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान और नागरिकों के मतदान के अधिकार को बचाना जरूरी है। संसद इसी व्यवस्था का हिस्सा है। किसी भी देश में लोकतंत्र कितना मजबूत है, इसका आकलन वहां के चुनाव आयोग की निष्पक्षता, स्वतंत्रता और ईमानदारी से किया जा सकता है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव डी राजा ने कहा कि उनकी पार्टी ने याचिका दायर की है। देशभर में लोग विरोध और आंदोलन कर रहे हैं। मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त को पद छोड़ देना चाहिए या उन्हें हटाया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से मामले पर विचार करने का आग्रह किया।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी सुप्रीम कोर्ट में कहा कि गठबंधन के सभी सहयोगियों ने याचिका दायर की है। वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करनी होगी। इस दौरान उन्होंने एसआईआर को रद्द करने की भी मांग की।
मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा कि विपक्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सभी दस्तावेज और सबूत सौंपेगा। उन्होंने दावा किया कि पूरे देश को कथित वोट चोरी के बारे में जानकारी है और विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ठाकरे ने 2024 में बनी केंद्र सरकार पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार कथित वोट चोरी के जरिए सत्ता में आई।
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(आईएएनएस)
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