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क्या फ्रिज में रखा आटा सच में जहर बन जाता है? जानिए क्या कहता है विज्ञान?

By HO BUREAU 

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Health Tips

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर कई स्वयंभू “हेल्थ गुरु” और इन्फ्लुएंसर इसी तरह के डरावने दावे कर रहे हैं। वे कहते हैं कि फ्रिज में रखा आटा जहरीला हो जाता है, उसमें खतरनाक बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं और यह शरीर को नुकसान पहुंचाता है।

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लेकिन सवाल है, क्या सच में ऐसा है? या फिर यह सिर्फ अधूरी जानकारी और डर फैलाने की एक और कहानी है? आइए इस पूरे मुद्दे को विज्ञान, खाद्य तकनीक और वैश्विक कुकिंग प्रैक्टिस के आधार पर समझते हैं।

सच्चाई: दुनिया की बेहतरीन बेकरी यही करती हैं।

अगर फ्रिज में रखा आटा वास्तव में “ज़हर” होता, तो दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित बेकरी और रेस्तरां ऐसा कभी नहीं करते। हकीकत यह है कि फ्रिज में आटा रखना एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसे Cold Fermentation कहा जाता है।

यूरोप, अमेरिका और एशिया की हाई-एंड बेकरी खासकर पिज़्ज़ा, ब्रेड और आर्टिसन बेकिंग में आटा 24 से 72 घंटे तक फ्रिज में रखा जाता है।

इसका उद्देश्य होता है: स्वाद को बेहतर बनाना, पाचन को आसान बनाना, आटे की संरचना (texture) को सुधारना। यानी जिसे कुछ लोग “बासी आटा” कहकर डराते हैं, वही असल में बेहतर और अधिक सुपाच्य आटा बन सकता है।

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“कोल्ड फर्मेंटेशनट” आटे में क्या होता है?

जब आटे को ठंडे तापमान पर रखा जाता है, तो उसमें धीमी गति से फर्मेंटेशन होता है। इस दौरान कुछ लाभकारी सूक्ष्मजीव (microorganisms) सक्रिय होते हैं, जिनमें शामिल हैं: Lactic Acid Bacteria, प्राकृतिक यीस्ट (Natural Yeast) ये वही सूक्ष्मजीव हैं जो कई स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं, जैसे: दही, इडली-डोसा का घोल, सावरडो ब्रेड, किमची और अचार। ये बैक्टीरिया खराब नहीं बल्कि लाभकारी होते हैं।

हर बैक्टीरिया खराब नहीं होता

सोशल मीडिया की सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि “बैक्टीरिया” शब्द सुनते ही लोग उसे खतरनाक समझ लेते हैं। असल में हमारे शरीर और भोजन की दुनिया में कई प्रकार के अच्छे बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जो पाचन में मदद करते हैं, आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, पोषक तत्वों को अधिक उपलब्ध बनाते हैं। इसी कारण फर्मेंटेड फूड्स को आज गट हेल्थ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

फ्रिज क्यों सुरक्षित है?

फ्रिज का तापमान सामान्यतः 4°C के आसपास होता है। इतना कम तापमान कई हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि को धीमा या लगभग रोक देता है। इसका मतलब भोजन लंबे समय तक सुरक्षित रहता है, खराब होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और इसी कारण पूरी दुनिया में फूड सेफ्टी सिस्टम का सबसे बुनियादी उपकरण रेफ्रिजरेशन है।

“बासी आटा” क्यों हो सकता है ज्यादा सुपाच्य

दिलचस्प बात यह है कि कुछ विशेषज्ञों के अनुसार ताजा गूंथा हुआ आटा हमेशा पाचन के लिए सबसे आसान नहीं होता। जब आटा थोड़ी देर रखा रहता है खासकर नियंत्रित ठंडे वातावरण में—तो उसमें ग्लूटेन संरचना बेहतर बनती है, कुछ जटिल कार्बोहाइड्रेट टूटने लगते हैं और फर्मेंटेशन के कारण पाचन आसान हो सकता है।
इसी वजह से सावरडो ब्रेड को दुनिया की सबसे हेल्दी ब्रेड में गिना जाता है।

असल खतरा कहाँ है?

वास्तविक समस्या तब होती है जब आटा लंबे समय तक कमरे के तापमान पर पड़ा रहता है, खासकर गर्म मौसम में।

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कमरे के तापमान पर हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं और भोजन जल्दी खराब हो सकता है। यही कारण है कि फूड सेफ्टी विशेषज्ञ हमेशा कहते हैं कि भोजन को या तो गर्म रखें या ठंडा। बीच के तापमान पर लंबे समय तक न छोड़ें।

तकनीक दुश्मन नहीं, सुरक्षा है। आज विकसित देशों में जैसे चीन, जापान, यूरोप, अमेरिका खाद्य सुरक्षा के लिए रेफ्रिजरेशन, फूड प्रोसेसिंग और आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग होता है।

इन तकनीकों ने भोजन की बर्बादी कम की, खाद्य जनित बीमारियों को घटाया और भोजन को अधिक सुरक्षित बनाया। यानी असली समस्या तकनीक नहीं, बल्कि उसका गलत उपयोग या गलत जानकारी है।

असली स्वास्थ्य समस्या क्या है?

कई पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली की बड़ी समस्याएँ कुछ और हैं: कम शारीरिक गतिविधि, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड,ज्यादा चीनी और जंक फूड, नींद की कमी। इन समस्याओं की तुलना में फ्रिज में रखा आटा लगभग नगण्य मुद्दा है।

डर नहीं, विज्ञान समझिए

फ्रिज में रखा आटा “ज़हर” है, यह दावा वैज्ञानिक तथ्यों से मेल नहीं खाता। असलियत यह है कि नियंत्रित तापमान में रखा आटा सुरक्षित हो सकता है। कोल्ड फर्मेंटेशन स्वाद और पाचन दोनों को बेहतर बना सकता है। दुनिया की बेहतरीन बेकरी यही तकनीक अपनाती हैं इसलिए अगली बार जब कोई सोशल मीडिया पर आपको डराने की कोशिश करे, तो याद रखिए। खाना उतना खतरनाक नहीं होता जितनी खतरनाक हो सकती है अधूरी जानकारी।

सपन दास  

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