1. हिन्दी समाचार
  2. दिल्ली
  3. सर्दियों की हरियाली: प्रदूषण के दौर में सेहत की सबसे सुलभ ढाल

सर्दियों की हरियाली: प्रदूषण के दौर में सेहत की सबसे सुलभ ढाल

भारत में सर्दी का मौसम केवल ठंड का एहसास नहीं कराता, बल्कि यह वह समय भी होता है जब खेतों से पोषण अपने सबसे शुद्ध रूप में हमारी थाली तक पहुँचता है। सर्दियों में उगने वाली सब्ज़ियाँ प्रकृति की उस समझदारी का प्रमाण हैं, जिसमें मौसम के साथ-साथ इंसान की ज़रूरतों का भी ख़याल रखा गया है।

By HO BUREAU 

Updated Date

भारत में सर्दी का मौसम केवल ठंड का एहसास नहीं कराता, बल्कि यह वह समय भी होता है जब खेतों से पोषण अपने सबसे शुद्ध रूप में हमारी थाली तक पहुँचता है। सर्दियों में उगने वाली सब्ज़ियाँ प्रकृति की उस समझदारी का प्रमाण हैं, जिसमें मौसम के साथ-साथ इंसान की ज़रूरतों का भी ख़याल रखा गया है। जब दिल्ली जैसे महानगर ज़हरीली हवा और बिगड़े AQI से जूझ रहे हों, तब यही मौसमी सब्ज़ियाँ शरीर के लिए सबसे भरोसेमंद सुरक्षा कवच बन जाती हैं।

पढ़ें :- युवा देश, बूढ़ी संसद? भारत को चाहिए सोच में भी पीढ़ीगत बदलाव

इन सब्ज़ियों की एक बड़ी विशेषता यह है कि ये न केवल सेहतमंद हैं, बल्कि आम आदमी की पहुँच में भी हैं। स्थानीय बाज़ारों में पालक, सरसों, मेथी, बथुआ, गाजर, मूली, शलगम, चुकंदर, फूलगोभी और मटर जैसी सब्ज़ियाँ सर्दियों में सहजता से और कम दामों पर मिल जाती हैं। जहाँ आधुनिक जीवनशैली हमें महंगे सप्लीमेंट्स और इम्युनिटी ड्रिंक्स की ओर धकेल रही है, वहीं ये सब्ज़ियाँ बिना किसी प्रचार के वर्षों से सेहत का काम कर रही हैं।

दिल्ली-एनसीआर की सर्दियों में प्रदूषण का असर सबसे पहले सांस और आंखों पर दिखाई देता है। हवा में घुले महीन कण फेफड़ों को कमज़ोर करते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को चुनौती देते हैं। ऐसे में सर्दियों की सब्ज़ियों में मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स शरीर को भीतर से मज़बूत करते हैं। ये पोषक तत्व न सिर्फ़ प्रदूषण से बनने वाले टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं, बल्कि संक्रमण और बैक्टीरिया से लड़ने की ताक़त भी बढ़ाते हैं।

पालक और सरसों खून को मज़बूत करने और शरीर की थकान दूर करने में सहायक होते हैं।
मेथी और बथुआ आंतों को साफ़ रखते हैं, जिससे इम्युनिटी का आधार मज़बूत होता है।
गाजर और चुकंदर त्वचा और फेफड़ों को प्रदूषण के दुष्प्रभाव से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
मूली और शलगम श्वसन तंत्र को राहत देते हैं और बलगम की समस्या को कम करते हैं।
हरी मटर और गोभी ऊर्जा के साथ-साथ शरीर की रक्षा प्रणाली को सक्रिय बनाए रखती हैं।

सर्दियों की इन सब्ज़ियों को रोज़मर्रा के भोजन में शामिल करना सिर्फ़ एक खान-पान का चुनाव नहीं, बल्कि एक समझदारी भरा निर्णय है। जब बाहरी वातावरण लगातार शरीर पर दबाव डाल रहा हो, तब भीतर की मज़बूती ही सबसे बड़ा सहारा बनती है। मौसमी भोजन अपनाने से न केवल बीमारियों से बचाव होता है, बल्कि शरीर मौसम के अनुसार खुद को बेहतर ढंग से ढाल पाता है।

पढ़ें :- अंकिता की आवाज़ अदालत तक पहुँची: जब जनदबाव ने CBI जांच का रास्ता खोला

दिल्ली की दमघोंटू हवा के बीच सर्दियों की सब्ज़ियाँ यह याद दिलाती हैं कि समाधान हमेशा महंगा या जटिल नहीं होता। कई बार जवाब हमारी रसोई और स्थानीय बाज़ार में ही मौजूद होता है, बस उसे पहचानने और अपनाने की ज़रूरत होती है।

✍️सपन दास 

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook, YouTube और Twitter पर फॉलो करे...
Booking.com
Booking.com