बढ़ता प्रदूषण, घटती पानी की उपलब्धता
दिल्ली में पीने के पानी की व्यवस्था एक बार फिर गंभीर दबाव में आ गई है। यमुना नदी में अचानक बढ़े प्रदूषण ने राजधानी के दो प्रमुख जल शोधन संयंत्र- वज़ीराबाद और चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) – को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। अधिकारियों के अनुसार, इन संयंत्रों की उत्पादन क्षमता 25 से 50 प्रतिशत तक सीमित करनी पड़ी है, क्योंकि वज़ीराबाद तालाब में पहुँच रहा कच्चा पानी अत्यधिक प्रदूषित हो चुका है।
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यही दोनों संयंत्र यमुना से पानी लेकर उत्तर, मध्य और दक्षिण दिल्ली के बड़े हिस्से को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में इनका प्रभावित होना पूरे शहर की जल आपूर्ति पर असर डाल रहा है।
DJB की चेतावनी: कम दबाव में आएगा पानी
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने स्थिति को लेकर आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा:
“यमुना में लगातार उच्च स्तर के प्रदूषक मिलने के कारण वज़ीराबाद और चंद्रावल WTP में जल उत्पादन 25–50% तक प्रभावित हुआ है। इस कारण पानी की आपूर्ति कम दबाव पर की जाएगी। हालात सामान्य होने तक नागरिकों से पानी का समझदारी से उपयोग करने की अपील की जाती है। आवश्यकता पड़ने पर 1916 हेल्पलाइन से टैंकर मंगाए जा सकते हैं।”
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DJB अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अमोनिया का स्तर तय मानकों से कहीं अधिक पहुँच गया है, जिससे संयंत्रों को पूरी क्षमता पर चलाना सुरक्षित नहीं रह गया।
कौन-कौन से इलाके सबसे ज़्यादा प्रभावित?
जिन क्षेत्रों में जल आपूर्ति मुख्य रूप से वज़ीराबाद और चंद्रावल संयंत्रों पर निर्भर है, वहाँ पानी कम दबाव में और सीमित समय के लिए उपलब्ध रहेगा। सुबह-शाम की सप्लाई में कटौती और टैंकरों पर निर्भरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे आम नागरिकों की रोज़मर्रा की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।
प्रदूषण की जड़ में क्या है?
यमुना में बढ़ते प्रदूषण के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं—
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- औद्योगिक कचरा और बिना शोधन का सीवेज
- नालों के ज़रिये लगातार गंदे पानी की निकासी
- पड़ोसी राज्यों से आने वाला दूषित जल
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इन स्रोतों पर सख़्ती से नियंत्रण नहीं होगा, तब तक दिल्ली की जल आपूर्ति बार-बार ऐसे संकटों से घिरती रहेगी।
संकट से निपटने की तैयारी और आगे की राह
DJB का कहना है कि यह स्थिति स्थायी नहीं है और जैसे ही यमुना में प्रदूषण का स्तर घटेगा, जल उत्पादन सामान्य हो जाएगा। साथ ही, दीर्घकालिक समाधान के लिए कई योजनाओं पर काम जारी है—
- सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता का विस्तार
- यमुना किनारे प्रदूषण रोकने के उपाय
- जल टैंकर सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना
इन कदमों का उद्देश्य भविष्य में ऐसे हालात दोबारा न बनने देना है।
नागरिकों से अपील: पानी की हर बूंद की कद्र करें
इस बीच DJB ने जनता से सहयोग की अपील की है- अनावश्यक पानी का उपयोग न करें, टंकियों की नियमित जाँच करें और ज़रूरत पड़ने पर ही टैंकर सेवा का सहारा लें। सामूहिक समझदारी से ही इस अस्थायी संकट को संभाला जा सकता है।
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निष्कर्ष: यमुना का प्रदूषण, दिल्ली की ज़िंदगी पर सीधा वार
यमुना में बढ़ता प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह सीधे दिल्ली के पीने के पानी और लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ गया है। जब नदी बीमार होती है, तो शहर की नल-जल व्यवस्था भी लड़खड़ा जाती है।
यह हालात एक बार फिर याद दिलाते हैं कि स्वच्छ नदी = सुरक्षित शहर। जब तक यमुना को गंभीरता से साफ़ करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक दिल्ली को ऐसे जल संकटों का सामना करते रहना पड़ेगा।