Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तराखंड
  3. उत्तराखंड की सड़कों पर गूंजता सवाल: अंकिता को न्याय कब मिलेगा?

उत्तराखंड की सड़कों पर गूंजता सवाल: अंकिता को न्याय कब मिलेगा?

By HO BUREAU 

Updated Date

Ankita Bhandhari Determined in the midst of protest

उत्तराखंड एक बार फिर सड़कों पर उतरे लोगों की आवाज़ से गूंज रहा है। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर न्याय की मांग ने 2026 में दोबारा ज़ोर पकड़ लिया है। यह केवल एक मामला नहीं रहा, यह उस भरोसे की परीक्षा बन चुका है, जो आम नागरिक न्याय व्यवस्था से करता है।

पढ़ें :- PDA ढोंग है, सपा प्रमुख अखिलेश यादव दलित विरोधी : ओपी राजभर

हालाँकि अदालत द्वारा आरोपियों को सज़ा सुनाई जा चुकी है, लेकिन जनता का असंतोष खत्म नहीं हुआ। लोगों का मानना है कि इस मामले के सभी पहलू अब तक सामने नहीं आए हैं। खास तौर पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति की संभावित भूमिका को लेकर उठते सवालों ने आंदोलन को फिर से हवा दी है।

देहरादून से लेकर अन्य जिलों तक प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। हाथों में तख़्तियाँ, नारों में गुस्सा और आंखों में उम्मीद, लोग एक ही मांग दोहरा रहे हैं: निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच। राज्य सरकार द्वारा “VIP एंगल” से इनकार किए जाने के बावजूद जनता का भरोसा डगमगाया हुआ है।

राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। विपक्ष इसे सत्ता की विफलता बता रहा है, तो सरकार इसे बेवजह उछाला गया मामला कह रही है। लेकिन इन सबके बीच, एक युवा लड़की की मौत और उसके परिवार का दर्द केंद्र में बना हुआ है।
अंकिता के लिए उठती आवाज़ें यह याद दिलाती हैं कि न्याय केवल फैसला सुनाए जाने से पूरा नहीं होता, न्याय तब पूरा होता है, जब समाज को सच पर भरोसा हो। उत्तराखंड की सड़कों पर चल रहा यह आंदोलन उसी भरोसे की तलाश है।

सपन दास 

पढ़ें :- UCC भारतीय संविधान के कई अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है : ओवैसी
Advertisement