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बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं पिछले कुछ महीनों में चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई हैं। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद से देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ है, जिसका सबसे बुरा प्रभाव हिंदुओं पर पड़ा है।

By HO BUREAU 

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बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं पिछले कुछ महीनों में चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई हैं। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद से देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ है, जिसका सबसे बुरा प्रभाव हिंदुओं पर पड़ा है।

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ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

1951 में पूर्वी पाकिस्तान में हिंदू आबादी 22 प्रतिशत थी। 1974 में स्वतंत्र बांग्लादेश में यह 13.4 प्रतिशत थी। आज यह घटकर मात्र 8 प्रतिशत से भी कम रह गई है। यह गिरावट लगातार हिंसा, भेदभाव और पलायन का परिणाम है।

दिसंबर 2025: रक्तरंजित महीना

दिसंबर 2025 में कम से कम बारह हिंदुओं की निर्मम हत्या की गई।

दीपू चंद्र दास की हत्या: 18 दिसंबर को 27 वर्षीय दीपू को भालुका में भीड़ ने पीटा, घसीटा और पेड़ से लटकाकर जिंदा जला दिया। वह एक कपड़ा मजदूर और तीन साल की बेटी का पिता था। झूठे ईशनिंदा आरोप लगाए गए, लेकिन जांच में कोई सबूत नहीं मिला। असल में यह नौकरी की प्रतिद्वंद्विता का परिणाम था।

अन्य हत्याएं: अमृत मंडल को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। 30 दिसंबर को बजेंद्र बिस्वास को गोली मारकर हत्या कर दी गई। 31 दिसंबर को खोकोन दास पर जिहादियों ने हमला किया और उन्हें जिंदा जला दिया।

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व्यापक हिंसा के आंकड़े

अगस्त 2024 से नवंबर 2025 तक अल्पसंख्यकों पर 2,673 हमले हुए। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, युनुस सरकार के तहत 300 से अधिक हिंदू मारे गए। 2025 में भीड़ हिंसा में 197 लोगों की मौत हुई। हिंदुओं पर 42 विशेष हमले हुए, जिसमें 36 घरों को आग लगाना, चार मंदिरों पर हमले और 64 मूर्तियों की तोड़फोड़ शामिल है।

हिंसा के मुख्य कारण

झूठे आरोप: अधिकांश ईशनिंदा के आरोप झूठे साबित हुए। इनका उपयोग व्यक्तिगत विवादों और संपत्ति हड़पने के लिए किया जाता है।

भीड़ न्याय: बिना सबूत और कानूनी प्रक्रिया के लोगों को मार डाला जा रहा है।

राजनीतिक अस्थिरता: हसीना सरकार के गिरने के बाद कानून-व्यवस्था गंभीर रूप से खराब हो गई। चरमपंथी समूहों को अधिक स्वतंत्रता मिली है।

संस्थागत विफलता: पुलिस और प्रशासन अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में विफल रहे हैं।

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अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

भारत सरकार ने हिंसा की कड़ी निंदा की। अमेरिकी विदेश विभाग ने दीपू की हत्या को “भयावह” बताया। लंदन में विरोध प्रदर्शन हुआ। एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया।

निष्कर्ष

बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति अत्यंत गंभीर है। यह व्यवस्थित उत्पीड़न का हिस्सा है। सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए और अपराधियों को सजा देनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लगातार दबाव बनाए रखना होगा ताकि मानवाधिकारों की रक्षा हो सके।

✍️सपन दास 

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