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आसमान में दीवारें: पाकिस्तान का भारतीय विमानों पर प्रतिबंध दसवें महीने में प्रवेश

By HO BUREAU 

Updated Date

Diplomatic tensions in the skies

बंद हवाई रास्ते, लंबा टकराव

भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव अब सिर्फ़ ज़मीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसमान में भी इसकी छाया साफ़ दिख रही है। पाकिस्तान ने एक बार फिर भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद रखने की अवधि बढ़ा दी है, जो अब 24 फ़रवरी 2026 तक लागू रहेगी। यह प्रतिबंध लगातार बढ़ते-बढ़ते अब दसवें महीने में पहुंच चुका है, जो अपने आप में अभूतपूर्व माना जा रहा है।

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पाकिस्तान की सिविल एविएशन अथॉरिटी द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक़, कराची और लाहौर एयर स्पेस भारतीय पंजीकृत विमानों के लिए पूरी तरह निषिद्ध रहेंगे। यह फैसला तकनीकी से ज़्यादा राजनीतिक माना जा रहा है।

 

एयरलाइंस पर बोझ, यात्रियों पर मार

हवाई क्षेत्र बंद होने का सीधा असर भारत की विमानन कंपनियों पर पड़ा है। उड़ानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन खर्च, समय और परिचालन लागत में भारी इज़ाफ़ा हुआ है। कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर टिकट महंगे हो गए हैं और यात्रियों को लंबी यात्रा झेलनी पड़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रतिबंध ने पहले से दबाव में चल रही भारतीय एयरलाइंस की आर्थिक सेहत को और कमजोर किया है। कुछ मार्गों पर तकनीकी ठहराव और रूट डायवर्ज़न अब आम बात हो गई है।

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सियासत का आसमानी हथियार

पाकिस्तान द्वारा हवाई क्षेत्र को बंद रखना केवल सुरक्षा कारणों का मामला नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक संदेश देने का एक ज़रिया भी बन चुका है। जब भी दोनों देशों के रिश्तों में तल्ख़ी बढ़ती है, आसमान सबसे पहले बंद किया जाता है।

आतंकवाद, सीमा विवाद और आपसी अविश्वास के बीच यह प्रतिबंध इस बात का संकेत है कि द्विपक्षीय संवाद फिलहाल ठंडे बस्ते में है।

आम यात्रियों की मुश्किलें

इस फैसले का खामियाज़ा सिर्फ़ एयरलाइंस नहीं, बल्कि आम यात्री भी भुगत रहे हैं।

सफ़र लंबा हो गया है

किराया बढ़ गया है

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कनेक्टिंग फ्लाइट्स का झंझट बढ़ा है

व्यापार, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय संपर्क-तीनों पर इसका असर साफ़ दिखाई दे रहा है।

 

निष्कर्ष

भारतीय विमानों के लिए पाकिस्तानी आसमान का बंद रहना अब एक अस्थायी कदम नहीं, बल्कि लंबे राजनीतिक गतिरोध का प्रतीक बन चुका है। जब तक दोनों देशों के बीच भरोसे की बर्फ़ नहीं पिघलती, तब तक यह ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ यात्रियों और विमानन उद्योग दोनों के लिए सिरदर्द बना रहेगा।

सपन दास   

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