ईरान के विदेश मंत्रालय ने तेल प्रतिबंधों में मिली छूट को रद्द करने के अमेरिकी फैसले की कड़ी निंदा की है। ईरान ने इसे इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के आर्टिकल 10 का गंभीर उल्लंघन बताया है। साथ ही, ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
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ईरानी विदेश मंत्रालय ने अपने एक आधिकारिक बयान में कहा, “मंत्रालय ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में दी गई अस्थायी राहत वापस लेने के अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के फैसले की कड़ी निंदा करता है। मंत्रालय इसे 18 जून 2026 को हुए ‘युद्ध विराम समझौते’ के अनुच्छेद 10 का गंभीर उल्लंघन मानता है। मंत्रालय इस वादे को तोड़ने से होने वाले नतीजों के लिए अमेरिकी सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराता है।”
बयान में कहा गया है कि इस्लामाबाद समझौते पर हस्ताक्षर होने के 20 दिन से भी कम समय में 3 जुलाई को जारी ‘सामान्य लाइसेंस’ को रद्द करने की घोषणा अमेरिकी अधिकारियों की गलत नीयत, अस्थिरता और अविश्वसनीयता का एक और स्पष्ट प्रमाण है। यह तब हुआ है जब पिछले बीस दिनों में अमेरिका ने, चाहे सीधे तौर पर या लेबनान के खिलाफ जायोनी शासन की कार्रवाई के जरिए, बार-बार समझौते की अलग-अलग शर्तों का उल्लंघन किया है।”
18 जून 2026 के समझौते को याद दिलाते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा, “समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से ईरान ने पूरी ईमानदारी से काम किया है और समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से पूरा करने के लिए अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया है। इसके बावजूद, अमेरिकी सरकार ने अपनी पुरानी आदत के अनुसार, अलग-अलग बहाने बनाकर अपनी जिम्मेदारियों के उल्लंघन को सही ठहराने की कोशिश की है और साथ ही अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है।” अमेरिका की ओर से अपने वादे तोड़ने के नतीजों के बारे में चेतावनी देते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह देश के राष्ट्रीय हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी कोई भी कदम उठाएगा।
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