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अप्रैल की भीषण गर्मी में राहत बनी प्री-मानसून बारिश

अप्रैल की तेज गर्मी से जूझ रहे देश में प्री-मानसून बारिश ने दी राहत। जानें इसका असर, फायदे और किसानों के लिए क्यों बढ़ी चिंता।

By HO BUREAU 

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अप्रैल का महीना इस साल भी अपने तेवर में नजर आ रहा है। देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और लोगों का जीना मुहाल हो गया है। सुबह से ही तेज धूप, दोपहर में झुलसा देने वाली लू और रात में भी गर्म हवाएं ये सब मिलकर आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में हर किसी के दिल से बस एक ही आवाज निकल रही है—“मेघा रे मेघा तू दूर मत जा, यहीं कहीं बरस जा।”

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उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अप्रैल की गर्मी ने पिछले कुछ वर्षों के रिकॉर्ड को चुनौती दी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कई शहरों में तापमान सामान्य से 3-5 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया है। वहीं, बिजली की मांग भी अपने चरम पर पहुंच गई है, जिससे कई जगहों पर कटौती की समस्या देखने को मिल रही है।

हालांकि, इस भीषण गर्मी के बीच कुछ इलाकों में हुई हल्की बारिश ने लोगों को थोड़ी राहत जरूर दी है। पिछले सप्ताह दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब के कुछ हिस्सों में अचानक आई बारिश और तेज आंधी ने तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट दर्ज की। इससे लोगों को राहत की सांस मिली और मौसम कुछ हद तक सुहावना हो गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल में होने वाली यह बारिश “प्री-मानसून एक्टिविटी” का हिस्सा होती है। यह बारिश भले ही अल्पकालिक राहत देती हो, लेकिन इसके अपने फायदे हैं। इससे मिट्टी की नमी बनी रहती है, फसलों को फायदा मिलता है और वातावरण में मौजूद धूल व प्रदूषण भी कम होता है।

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लेकिन दूसरी तरफ, यह भी सच है कि अप्रैल की यह अनियमित बारिश कई बार किसानों के लिए चिंता का कारण बन जाती है। खासकर गेहूं की कटाई के समय अगर बारिश हो जाए, तो फसल को नुकसान पहुंच सकता है। इस साल भी कई राज्यों में किसानों ने इस तरह की चिंताओं को जाहिर किया है।

गर्मी और बारिश के इस मिलेजुले असर के बीच आम लोगों का जीवन एक तरह से मौसम के भरोसे चल रहा है। दिन में तेज गर्मी से बचने के लिए लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं, वहीं शाम को अगर बादल छा जाएं तो लोग राहत की उम्मीद में आसमान की ओर टकटकी लगाए रहते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इस मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। तेज गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में पर्याप्त पानी पीना, धूप में कम निकलना और हल्के कपड़े पहनना बेहद जरूरी हो गया है।

अप्रैल का यह मौसम हमें प्रकृति के दो रूप दिखा रहा है एक ओर तपती गर्मी, तो दूसरी ओर राहत देती बारिश। लेकिन फिलहाल देशवासियों की यही ख्वाहिश है कि बादल ज्यादा देर तक दूर न रहें और समय-समय पर बरसते रहें, ताकि इस झुलसाती गर्मी से थोड़ी राहत मिल सके।

✍️सपन दास 

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