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चिता पर लेटी आदिवासी महिलाएं: Ken-Betwa River Linking Project के खिलाफ उग्र विरोध

मध्य प्रदेश के Chhatarpur और Panna में आदिवासी महिलाओं का “चिता आंदोलन” तेज। Ken-Betwa River Linking Project के खिलाफ जमीन, जंगल और अस्तित्व की लड़ाई।

By HO BUREAU 

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मध्य प्रदेश | विशेष रिपोर्ट : देश में विकास के नाम पर चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने हर किसी को झकझोर दिया है।

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आदिवासी महिलाएं खुद को चिता (अंतिम संस्कार की लकड़ियों) पर लिटाकर विरोध कर रही हैं।

यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि हकीकत है जहां महिलाएं कह रही हैं:
“अगर हमारी जमीन छीनी गई, तो ये हमारे लिए मौत से कम नहीं।”

क्या है पूरा मामला? कहां हो रहा है ये विरोध?

यह विरोध मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में चल रहा है, जहां आदिवासी समुदाय की महिलाएं Ken-Betwa River Linking Project के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं।

इस आंदोलन को नाम दिया गया है
“चिता आंदोलन”

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जहां महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से चिता पर लेटकर यह दिखा रही हैं कि
यह प्रोजेक्ट उनके जीवन, जमीन और अस्तित्व के लिए ‘मौत का फरमान’ है।

कौन कर रहा है ये विरोध?

सैकड़ों आदिवासी महिलाएं कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ भी इस आंदोलन में शामिल स्थानीय किसान और सामाजिक संगठन भी साथ यह आंदोलन अब सिर्फ विरोध नहीं, “जन आंदोलन” बन चुका है।

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क्यों भड़का है इतना गुस्सा?

आदिवासी समुदाय के मुख्य आरोप:

1. जमीन और जंगल का नुकसान

  • कई गांव पूरी तरह डूब जाएंगे
  • लाखों पेड़ कटने की आशंका
  • जंगल और आजीविका खत्म होने का डर

2. विस्थापन का खतरा

  • करीब 20+ गांव प्रभावित
  • पीढ़ियों से बसे लोगों को हटाया जाएगा
  • सही पुनर्वास (rehabilitation) नहीं मिला

3. मुआवजे पर सवाल

  • लोगों का कहना है कि उन्हें पूरा या सही मुआवजा नहीं मिला
  • “land-for-land” जैसी नीति लागू नहीं

4. पर्यावरण पर खतरा

  • पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा प्रभावित
  • वन्यजीवों के अस्तित्व पर खतरा

सरकार क्यों नहीं रोक रही प्रोजेक्ट?

सरकार का दावा है कि:

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  • इस प्रोजेक्ट से 10 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई मिलेगी
  • 62 लाख लोगों को पानी मिलेगा
  • बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों को राहत मिलेगी

यानी सरकार इसे “विकास” और “जरूरत” के तौर पर देख रही है लेकिन सवाल यही है क्या विकास की कीमत इंसानों की जिंदगी और उनकी जमीन होनी चाहिए?

आंदोलन पर आरोप और तनाव

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि:

  • प्रशासन ने रास्ते बंद किए
  • खाने-पीने की सप्लाई रोकी गई
  • दिल्ली जाने से रोका गया
  • दबाव और धमकी दी जा रही है

वहीं प्रशासन का कहना है कि वे बातचीत के जरिए हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

चिता क्यों? इतना बड़ा प्रतीक क्यों चुना?

महिलाओं का कहना है:
“जब हमारी जमीन डूबेगी, तो हमारी जिंदगी खत्म हो जाएगी…
तो फिर जिंदा रहकर क्या करेंगे?”

इसलिए उन्होंने चिता को चुना
एक ऐसा प्रतीक, जो सीधे मौत और अस्तित्व से जुड़ा है।

✍️सपन दास 

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