नई दिल्ली|12 अगस्त 2026: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन CAG रिपोर्ट्स को लेकर पिछली आम आदमी पार्टी सरकार पर वित्तीय अनियमितताओं और योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि CAG रिपोर्ट्स पिछली सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड हैं और वर्तमान सरकार पारदर्शिता व जवाबदेही के लिए प्रशासनिक सुधार कर रही है।
पढ़ें :- दिल्ली में 17 साल पुराना बेड एंड ब्रेकफास्ट कानून खत्म होगा, पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने विधानसभा में पेश किया निरसन विधेयक
CAG रिपोर्ट्स को बताया पिछली सरकार का रिपोर्ट कार्ड
मुख्यमंत्री ने कहा कि CAG देश की सर्वोच्च संवैधानिक ऑडिट संस्था है और उसकी रिपोर्ट किसी राजनीतिक दल द्वारा तैयार नहीं की गई है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार के करीब डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में 19 CAG रिपोर्ट्स विधानसभा में रखी जा चुकी हैं। रिपोर्ट्स में स्वास्थ्य, शिक्षा, दिल्ली जल बोर्ड, PWD, विज्ञापन और सब्सिडी सहित कई क्षेत्रों से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख है।
बजट होने के बावजूद योजनाओं पर खर्च नहीं
रेखा गुप्ता ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में दिल्ली का बजट करीब 80,798 करोड़ रुपये था, लेकिन लगभग 61 हजार करोड़ रुपये ही खर्च हुए। उनके अनुसार करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई योजनाओं के लिए बजट में राशि रखी गई, लेकिन जमीन पर काम नहीं हुआ।
19,973 करोड़ की योजनाओं के UC लंबित
मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 19,973 करोड़ रुपये की योजनाओं से जुड़े 1,734 Utilization Certificates लंबित थे, जबकि केवल 482 जमा किए गए। उन्होंने कहा कि UC से यह पता चलता है कि सरकारी धन किस तरह और कहां खर्च हुआ। ऐसे प्रमाणपत्र लंबित रहने से खर्च की निगरानी और जवाबदेही प्रभावित होती है।
530 करोड़ के 45 टेंडर एक PAN से
टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 530 करोड़ रुपये की कुल राशि के 45 टेंडर एक ही PAN कार्ड से किए गए। उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए GeM को अनिवार्य कर रही है। विभागों की खरीद प्रक्रिया की समीक्षा भी की जा रही है।
पढ़ें :- भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में कोर्ट ने जारी किया गैर - जमानती वारंट, 11 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश
प्रशासनिक सुधारों पर सरकार का जोर
रेखा गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में कार्रवाई के तहत 40 अधिकारियों का ट्रांसफर और तीन अधिकारियों का निलंबन किया गया। GST विभाग में लंबे समय से एक जगह तैनात 150 अधिकारियों की पोस्टिंग बदली गई और रैंडम पोस्टिंग के लिए लकी ड्रॉ अपनाया गया। सरकार ने ई-ऑफिस और ई-कैबिनेट की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।
दीमक’ हटाने के लिए ‘पेस्टिसाइड’ का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली व्यवस्था में जो ‘दीमक’ लगी थी, उसे हटाने के लिए सरकार ने ‘पेस्टिसाइड’ का छिड़काव किया है। उन्होंने बिजली कंपनियों की करीब 38 हजार करोड़ रुपये की रेगुलेटरी एसेट और टेंडर प्रक्रिया जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से CAG रिपोर्ट्स पर आगे कार्रवाई तेज करने की अपील करते हुए कहा कि सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
CAG रिपोर्ट के अनुसार सबसे अहम आंकड़े
- ₹80,798 करोड़ का बजट, दावा करीब ₹61,000 करोड़ खर्च
- ₹19,973 करोड़ की योजनाओं से जुड़े 1,734 UC लंबित, 482 जमा
- ₹530 करोड़ के 45 टेंडर एक PAN से होने का दावा
- ₹38,000 करोड़ की रेगुलेटरी एसेट का मुद्दा
- 19 CAG रिपोर्ट्स विधानसभा में पेश किए जाने का दावा
- 40 अधिकारियों का ट्रांसफर और 3 अधिकारियों के निलंबन का उल्लेख
- GST विभाग में 150 अधिकारियों की पोस्टिंग बदलने की बात
बहरहाल इस पूरे मामले में राजनीतिक संदेश साफ है सरकार CAG रिपोर्ट्स के जरिए पिछली सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठा रही है, जबकि साथ ही ई-ऑफिस, GeM, रैंडम पोस्टिंग और ई-कैबिनेट जैसे सुधारों को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है।
नोट (डिस्क्लेमर)
इस लेख में व्यक्त सभी विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इन्हें केवल वेब पोर्टल पर प्रकाशन हेतु संपादित एवं व्यवस्थित किया गया है। मूल भाव, आशय एवं तथ्यों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। इस लेख में व्यक्त विचारों, मतों अथवा उनसे उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष परिणाम के लिए वेब पोर्टल अथवा उसके प्रकाशक किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं होंगे।
पढ़ें :- राज्यसभा में पास हुआ बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, निर्मला सीतारमण बोलीं - "पूरी प्राइवेसी और सुरक्षा..."
देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें।