राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-NCR में 16 फरवरी 2026 को इस साल का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जब अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया, जो इस मौसम के औसत से लगभग 7 डिग्री ज़्यादा था।
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-NCR में 16 फरवरी 2026 को इस साल का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जब अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया, जो इस मौसम के औसत से लगभग 7 डिग्री ज़्यादा था। दिन के दौरान धूप इतनी तेज़ रही कि लोग पंखा चलाते दिखे और मौसम ने लोगों को मार्च-अप्रैल जैसा अनुभव दिया।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक़, दिल्ली में अचानक तापमान बढ़ने का कारण पश्चिमी विक्षोभ का कमजोर पड़ना और साफ़ आसमान है, जिससे धूप बिना किसी रोक-टोक के ज़मीन तक पहुँच रही है। सफदरजंग वेधशाला में दर्ज अधिकतम तापमान 31.6°C रहा — यह फरवरी के मध्य में 30°C पार होने का पहला मौका पांच साल में माना जा रहा है।
आयनागर, लोदी रोड और रिज़ जैसे अन्य मौसम स्टेशनों पर भी सामान्य से कई डिग्री अधिक तापमान रिकॉर्ड हुआ, जिससे दिल्ली-एनसीआर की गर्मी में अचानक वृद्धि का संकेत मिला।
सिर्फ़ तापमान ही असामान्य नहीं था—राजधानी की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) भी ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज हुई। AQI लगभग 250 से ऊपर रहा, जिसका अर्थ है कि वायु में धूल, धुएँ और कण प्रदूषण का स्तर सामान्य से काफी ज़्यादा था। यह स्थिति लोगों, खासकर बच्चों, बुज़ुर्गों और श्वास संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य खतरा बन सकती है।
फरवरी महीने में इतनी अधिक धूप और गर्मी अपेक्षित नहीं होती—आम तौर पर इस समय ठंडी और संयमित तापमान की अपेक्षा रहती है। लेकिन इस बार दिन के तापमान में बड़ी छलांग और रात के तापमान का मौसम के औसत के करीब रहना यह संकेत देता है कि सर्दी जल्दी पीछे हट रही है और गर्मी की शुरुआत असामान्य रूप से पहले हो रही है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से छींटेदार बारिश भी हो सकती है, जिससे तापमान में कुछ कमी आ सकती है और वायु गुणवत्ता में थोड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
यह सिर्फ एक नया तापमान रिकॉर्ड नहीं है, यह जलवायु में बदलते पैटर्न का संकेत है:
इन बदलावों से स्वास्थ्य, रोज़मर्रा की ज़िंदगी और पर्यावरण पर दबाव बनता है, खासकर उन लोगों पर जो बाहर अधिक समय बिताते हैं।
दिल्ली की इस असामयिक गर्मी और खराब AQI ने यह याद दिलाया है कि मौसम और वातावरण अस्थिर हो रहे हैं, एक चेतावनी कि जलवायु परिवर्तन केवल आगाह कर रहा है, लेकिन इसके प्रभाव धीरे-धीरे हमारी ज़िंदगी में सीधे दिख रहे हैं। थोड़ा सुधार बारिश से आ सकता है, लेकिन दिन-प्रतिदिन के मौसम के असंतुलन पर ध्यान देना अब ज़रूरी है।