दिल्ली सरकार ने 09 फरवरी 2026 को एक बड़ी पहल के तहत 500 नई इलेक्ट्रिक बसों (EV buses) को रमलीला मैदान से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे दिल्ली अब देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क वाला शहर बन गया है।
Updated Date
दिल्ली सरकार ने 09 फरवरी 2026 को एक बड़ी पहल के तहत 500 नई इलेक्ट्रिक बसों (EV buses) को रमलीला मैदान से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे दिल्ली अब देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क वाला शहर बन गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने समारोह में कहा कि यह बसें एसी, CCTV, पैनिक बटन और आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं, और यह कदम सफर को पर्यावरण के अनुकूल और स्वच्छ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इन 500 बसों को शामिल करने के बाद दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के इलेक्ट्रिक बस बेड़े की संख्या 4,286 से ऊपर पहुँच गई है — जो किसी भी राज्य का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क है। लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक इसे 7,500 और 2028 तक 14,000 तक पहुँचाया जाए।
यह उपलब्धि न केवल वाहन उन्नयन को दर्शाती है, बल्कि यह यातायात से होने वाले प्रदूषण को कम करने और समर्थ, आधुनिक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिल्ली सरकार की रणनीति भी है।
इसी मौके पर दिल्ली से Panipat के लिए नई इंटर-स्टेट इलेक्ट्रिक बस सेवा भी शुरू की गई, जो करीब 86 किलोमीटर का मार्ग तय करेगी और सिंगू बॉर्डर, मुरथल, समलखा जैसे प्रमुख स्टॉप्स से गुजरेगी। यह सेवा विशेष रूप से दैनिक ऑफ़िस जाने-वाले और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए उपयोगी साबित होगी।
यह कदम पहले से बंद पड़ी इंटर-स्टेट सेवाओं को एक शांत, सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त विकल्प के रूप में पुनर्जीवित करता है।
नई इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई सुविधाएँ शामिल हैं:
इन बसों का उद्देश्य ट्रैफिक भीड़, प्रदूषण और निजी वाहनों पर निर्भरता को कम करना है, जिससे यात्रा का अनुभव बेहतर और पर्यावरण मित्र बने।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि सरकार ने DTC के लिए ₹1,200 करोड़ का ग्रांट मंज़ूर किया है, जिसमें ज्यादातर राशि बस चालकों, कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन सहित दी जाएगी, और बाकी EV चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा ट्रैफ़िक मैनेजमेंट सिस्टम के विकास के लिए होगी।
यह निवेश सीधे लाइसेंस, रखरखाव और संचालन क्षमता को मजबूत करेगा, जिससे दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन और भी विश्वसनीय और सशक्त बनेगा।
दिल्ली सरकार की यह पहल केवल बसें चलाने से कहीं आगे है, यह स्मार्ट, ग्रीन और समावेशी सार्वजनिक परिवहन का उज्जवल उदाहरण है।
इन प्रगतिशील कदमों से न केवल दिल्ली के नागरिकों को बेहतर यात्रा विकल्प मिलेगा, बल्कि यह मॉडल अन्य भारतीय शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है — जहाँ स्वच्छ ऊर्जा, किफ़ायती सेवाएँ और भविष्य-तैयार परिवहन को प्राथमिकता दी जाती है।