1. हिन्दी समाचार
  2. ख़बरें जरा हटके
  3. कभी लाईब्रेरियन तो कभी कार्टूनिस्ट से फिल्म दुनिया तक का सफर तय किया इस महान फिल्मकार ने

कभी लाईब्रेरियन तो कभी कार्टूनिस्ट से फिल्म दुनिया तक का सफर तय किया इस महान फिल्मकार ने

आज के इतिहास में जानें उस फिल्मकार के बारे में जिसने मथुरा और आगरा से पढ़ाई कर लाईब्रेरियन तो कभी कार्टूनिस्ट की जॉब की थी।

By इंडिया वॉइस 
Updated Date

कैमरे में मध्यमवर्ग का चेहरा गढ़ने वाला फिल्मकारः उनकी फिल्मों की कहानियां आम जिंदगी के इतने करीब थी कि उसके फिल्मी होने को लेकर शक पैदा होने लगे। नायक का चेहरा-मोहरा और ढंग-ढर्रे ऐसा कि उस दौर का हर मामूली नौजवान उससे जुड़ा हुआ महसूस करता था। बासु चटर्जी की फिल्में मध्यम वर्ग के सपनों और दुविधाओं की नायाब कहानियां हैं। एक समय जिसे समानांतर सिनेमा/ आर्ट फिल्म कहा गया, उस श्रेणी में रखी गयी शुरुआती कुछ फिल्मों में बासु चटर्जी की फिल्में भी थीं। मसलन, साहित्यकार राजेंद्र यादव के उपन्यास पर आधारित फिल्म ‘सारा आकाश।’ साधारण लोगों की कहानियों कहने वाले बासु चटर्जी असाधारण फिल्मकार बन गए।

पढ़ें :- औरंगजेब की नींद उड़ा देने वाले संभाजी का आज ही के दिन हुआ था राज्याभिषेक

रेलवे में मुलाजिम पिता के पुत्र बासु चटर्जी का जन्म 10 जनवरी 1927 को अजमेर में हुआ। बाद में उनका परिवार मथुरा पहुंचा। मथुरा और आगरा में उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई। यहीं गीतकार शैलेंद्र और साहित्यकार राजेंद्र यादव से दोस्ती भी हुई। आजीविका की तलाश में जब मुंबई पहुंचे तो पहले एक स्कूल में कुछ समय के लिए लाइब्रेरियन और बाद में ‘ब्लिट्ज’ के कार्टूनिस्ट के तौर पर लंबे अरसे तक काम किया।

‘सारा आकाश’ से शुरू हुआ बासु चटर्जी का फिल्मी सफर ‘रजनीगंधा’, ‘चितचोर’ ‘छोटी-सी बात’, ‘खट्टा-मीठा’, ‘बातों-बातों में’, ‘स्वामी’, ‘शौकीन’, ‘चमेली की शादी’ जैसी नायाब फिल्मों से होता हुआ उस मुकाम पर पहुंचा, जहां पहुंचना दूसरे फिल्मकारों के लिए आसान नहीं है। उन्होंने हिंदी साहित्य से अपनी फिल्मों की कहानियां लीं। दूसरे, मध्यम वर्ग की उम्मीदों-उदासियों की दास्तां कहने वाले बासु चटर्जी के लिए फिल्म की कहानी प्रधान थी, नायक-नायिका नहीं। खूब यह कि अपनी इस सोच को उन्होंने कामयाब बनाकर दिखाया। 93 वर्ष की उम्र में 4 जून 2020 को उन्होंने अंतिम सांसें लीं।

अन्य अहम घटनाएंः

1616ः ब्रिटिश राजदूत थॉमस रो ने अजमेर में मुगल बादशाह जहांगीर से मुलाकात की।

पढ़ें :- क्या आपको मालूम है आज के दिन क्यों मनाया जाता है सेना दिवस?

1692ः कलकत्ता के संस्थापक जॉब कारनॉक का कलकत्ता में निधन।

1886ः भारत के शिक्षाविद्, अर्थशास्त्री और न्यायविद् जॉन मथाई का जन्म।

1908ः हिंदी साहित्यकार पद्मनारायण राय का जन्म।

1940ः भारतीय पार्श्व गायक और संगीतकार के.जे. येसुदास का जन्म।

1969ः सुप्रसिद्ध राजनेता व लेखक सम्पूर्णानंद का निधन।

पढ़ें :- "कुछ सुखों की इच्छा ही मेरे दुखों का कारण है" जानें उस लेखक के बारे में जिसे पूरी दुनिया में मिली अभूतपूर्व शौहरत

1972ः पाकिस्तान की जेल में 9 महीने रहने के बाद शेख मुजीबुर्रहमान रिहा होकर अपने स्वतंत्र देश पहुंचे।

1974ः भारतीय अभिनेता ऋतिक रोशन का जन्म।

1975ः नागपुर में प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook, YouTube और Twitter पर फॉलो करे...