केंद्रीय बजट 2026-27 को सरकार ने बड़े प्रयोगों की बजाय संतुलन और निरंतरता का बजट बताया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश इस बजट में न तो अचानक झटके दिए गए और न ही लोकलुभावन घोषणाओं की बाढ़ लाई गई। फोकस साफ दिखा आर्थिक स्थिरता बनाए रखना, निवेश को बढ़ावा देना और नियमों को सरल बनाना।
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केंद्रीय बजट 2026-27 को सरकार ने बड़े प्रयोगों की बजाय संतुलन और निरंतरता का बजट बताया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश इस बजट में न तो अचानक झटके दिए गए और न ही लोकलुभावन घोषणाओं की बाढ़ लाई गई। फोकस साफ दिखा आर्थिक स्थिरता बनाए रखना, निवेश को बढ़ावा देना और नियमों को सरल बनाना।
यह बजट उन लोगों के लिए ज्यादा मायने रखता है जो हर साल टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद करते हैं, लेकिन इस बार सरकार ने “छेड़छाड़ नहीं, सुधार” की नीति अपनाई।
Budget 2026 में इनकम टैक्स स्लैब और दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। इसका सीधा मतलब है कि न तो नया बोझ बढ़ा और न ही कोई बड़ी राहत दी गई।
Budget 2026 का सबसे बड़ा और दूरगामी फैसला नए Income Tax Act के लागू होने को लेकर है। 1961 के पुराने कानून को बदलकर अब एक सरल, छोटा और आधुनिक टैक्स कानून लाया जा रहा है।
सरकार का दावा है कि इससे टैक्स विवाद कम होंगे और आम करदाता को वकीलों और नोटिसों के चक्कर से राहत मिलेगी।
इस बजट का मध्यम वर्ग पर असर मिश्रित है।
लेकिन दूसरी ओर—
यानी यह बजट उम्मीदों से कम, लेकिन झटकों से भी दूर रहा।
Budget 2026 सिर्फ टैक्स तक सीमित नहीं रहा। सरकार ने कई क्षेत्रों में लंबी दूरी की सोच दिखाई—
इन फैसलों का मकसद रोजगार सृजन, उद्योग विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत करना है।
लाभ में रहे:
पीछे रह गए:
Budget 2026 कोई “वाह-वाह” कराने वाला बजट नहीं है, लेकिन यह स्थिर, सोच-समझकर बनाया गया बजट जरूर है। सरकार ने टैक्स में बड़े बदलाव न करके संकेत दिया है कि वह अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाना चाहती है।
यह बजट कहता है:
मध्यम वर्ग के लिए यह बजट भले ही सपनों जैसा न हो, लेकिन यह भरोसा जरूर देता है कि नियम अचानक नहीं बदलेंगे। Budget 2026 को अगर एक लाइन में समझें, तो यह है—“धीमी मगर टिकाऊ आर्थिक चाल।”