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दिल्ली

गणतंत्र दिवस 2026: जब ‘वंदे मातरम्’ बनेगा भारत की आत्मा का स्वर

HO BUREAU

26 जनवरी 2026 को कार्तव्य पथ पर होने वाला गणतंत्र दिवस समारोह इस बार सिर्फ़ परेड नहीं होगा, बल्कि भारत की भावनात्मक विरासत का उत्सव बनेगा। इस वर्ष की परेड का केंद्रीय विषय है- ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष।

Republic Day 2026 celebration in New Delhi
Republic Day 2026 celebration in New Delhi
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150 साल का राष्ट्रगीत-समान गीत

26 जनवरी 2026 को कार्तव्य पथ पर होने वाला गणतंत्र दिवस समारोह इस बार सिर्फ़ परेड नहीं होगा, बल्कि भारत की भावनात्मक विरासत का उत्सव बनेगा। इस वर्ष की परेड का केंद्रीय विषय है —
‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष।

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की चेतना रहा है। 150 वर्षों बाद भी इसकी गूंज उतनी ही प्रासंगिक है।

 

संस्कृति, कला और इतिहास की जीवंत झलक

इस ऐतिहासिक अवसर पर कार्तव्य पथ को वंदे मातरम् से प्रेरित कलाकृतियों से सजाया जाएगा। गीत के अलग-अलग पदों को चित्रों, इंस्टॉलेशन और दृश्य प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा।

देशभर में 19 से 26 जनवरी के बीच सैन्य बैंडों द्वारा विशेष प्रस्तुतियां होंगी, ताकि यह भावना सिर्फ़ दिल्ली तक सीमित न रहे, बल्कि हर कोने तक पहुंचे।

ताक़त और परंपरा का संगम

2026 की परेड में भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता साथ-साथ दिखाई देगी।

झांकियों में ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक यात्रा

आत्मनिर्भर भारत की झलक

संविधान, संस्कृति और समकालीन भारत की कहानी

यह परेड संदेश देगी कि भारत अपनी जड़ों में मज़बूत रहते हुए भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

 

वैश्विक मंच पर भारत

इस वर्ष के गणतंत्र दिवस में यूरोपीय नेतृत्व की मौजूदगी भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाती है। विदेशी अतिथियों की उपस्थिति यह बताती है कि भारत अब सिर्फ़ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक संवाद का केंद्र बन चुका है।

 

निष्कर्ष: गीत, गणतंत्र और गर्व

गणतंत्र दिवस 2026 एक याद दिलाने वाला अवसर है:
कि भारत सिर्फ़ संविधान से नहीं, बल्कि भावनाओं, गीतों और साझा स्मृतियों से बना है।

✍️सपन दास       

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