संसद में परीक्षा संशोधन बिल 2026 पेश। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को माना और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।
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सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक पर रोक लगाने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 संसद में पेश किया है। इस संशोधित विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।
विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही जांच पूरी करने के लिए दो महीने की समय-सीमा, मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों और पैरवी के लिए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का भी प्रावधान किया गया है। दोषियों के लिए कड़ी सजा और आर्थिक दंड का भी प्रस्ताव है।
इसी बीच, नीट परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना छात्रों का संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रदर्शनकारियों पर अनावश्यक पुलिस कार्रवाई न की जाए और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वालों की जवाबदेही तय हो।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए और 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र जांच के जरिए प्रदर्शनकारियों और पुलिस, दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 18 वर्ष से कम उम्र के उन प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
अब चर्चा इस बात की है कि क्या नया संशोधित कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाएगा, क्या इससे नकल और पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगेगी, और क्या यह फैसला छात्रों के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था के बीच बेहतर संतुलन स्थापित कर पाएगा।
Written By- Manoj Bisaria
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