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मणिपुर राहत कैंप में मौतों पर SC की राज्य सरकार को फटकार, कहा – ‘आदेश जारी करने के लिए मजबूर न करें’

Supreme Court : मणिपुर राहत कैंप में हुई मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को अहम कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।✍️Avinay Mishra

By HO BUREAU 

Updated Date

Supreme Court : मणिपुर राहत कैंप में हुई मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को अहम कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने शीर्ष अधिकारियों से कहा कि जस्टिस गीता मित्तल कमेटी की रिपोर्ट ने जानकारी दी। इस पर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?

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बेंच ने कहा कि ‘हम मणिपुर के मुख्य सचिव को निर्देश देते हैं कि वे मणिपुर के राहत कैंपों में हुई मौतों, खासकर असामान्य मौतों, पर एक हलफनामा दाखिल करें। साथ ही, बेंच ने यह भी पूछा कि मौत के 34 मामलों में से केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम क्यों कराए गए। राज्य को यह भी बताना होगा कि राहत कैंपों में शरण लेने वाले जिन विस्थापित लोगों की असामान्य मौतें हुईं, उन्हें मुआवज़े के तौर पर केवल 20 से 30 हजार रुपये ही क्यों दिए गए। अपने मुख्य सचिव से कहें कि वे अदालत को आदेश जारी करने के लिए मजबूर न करें।’

‘असामान्य मौत के सभी मामलों में FIR दर्ज की जाएं’

कोर्ट ने मणिपुर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण MSLSA को भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर एक अलग स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। वह यह भी सुनिश्चित करे कि असामान्य मौत के सभी मामलों में FIR दर्ज की जाएं। वह देखे कि FIR की जांच तेजी से हो और राहत कैंपों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए।

दरअसल जस्टिस मित्तल कमेटी और आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट सामने आई। जिसमें यह पता चला कि मणिपुर के राहत कैंपों में 30 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। रिपोर्ट मुताबिक, एक मौत पर बताया जा रहा है कि कथित यौन उत्पीड़न के बाद मौत हुई, मणिपुर में 2023 की हिंसा से जुड़े CBI और NIA के मामलों की सुनवाई दो विशेष ट्रायल कोर्ट कर रही हैं। इस पर बेंच ने कहा कि उम्मीद है कि विशेष ट्रायल कोर्ट तेजी से अपना ट्रायल पूरा करेंगी।

✍️Avinay Mishra

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