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Paper leak Case : NTA में सुधारों की प्रगति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जज ने दिया ऑफिस के दौरे का संकेत

HO BUREAU

Paper leak Case : नीट परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए में सुधारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई।

Paper leak Case : एनटीए में सुधारों की प्रगति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जज ने दिया ऑफिस के दौरे का संकेत
Paper leak Case : एनटीए में सुधारों की प्रगति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जज ने दिया ऑफिस के दौरे का संकेत
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Paper leak Case : नीट परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए में सुधारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह एनटीए के कार्यालय का दौरा कर सकता है, ताकि मौके पर जाकर यह देखा जा सके कि परीक्षा आयोजित करने वाला सिस्टम वास्तव में काम कर रहा है या नहीं।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें नीट का पेपर लीक होने के बाद एनटीए में व्यापक सुधार करने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि नंदन नीलेकणि की अगुवाई में गठित एक नए उच्चस्तरीय टास्क फोर्स ने डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया है। उन्होंने अदालत से टास्क फोर्स की रिपोर्ट पेश करने के लिए सितंबर के अंत तक का समय देने का अनुरोध किया।

इस पर कोर्ट ने कहा कि एनटीए में सुधार के लिए कमेटी की सिफारिशें सिर्फ रिपोर्ट तक सीमित न रहें, उन पर अमल होना भी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर्ड कमेटी के साथ समन्वय कर रहे संयुक्त सचिव को प्रगति पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने एनटीए को अपनी सुधारों की प्रगति की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि एनटीए अपनी वेबसाइट पर संस्था में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी वाला हलफनामा डाले, ताकि छात्र और दूसरे पक्ष सुधारों की स्थिति देख सकें।

कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि एनटीए में पर्याप्त स्टाफ और एक्सपर्ट की जरूरत है। केवल डेपुटेशन पर कर्मचारियों से काम नहीं चलना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी। इससे पहले 19 अगस्त को भी सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की थी। तब कोर्ट ने कहा था कि एनटीए में किए जा रहे सुधारों को संस्थागत रूप देने की जरूरत है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह के. राधाकृष्णन समिति और निलेकणि समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दे। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सुधार जमीन पर भी दिखने चाहिए, ताकि नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं में गड़बड़ी न हो और छात्रों का भरोसा बना रहे। (आईएएनएस)

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इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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