लखनऊ में आज 18 फरवरी को इंडिया वॉयस न्यूज़ चैनल द्वारा एक विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। इस कॉन्क्लेव का विषय है, “यूपी का बजट: तरक्की का मास्टर प्लान”, जो उत्तर प्रदेश के आर्थिक भविष्य, विकास की दिशा और नीतिगत प्राथमिकताओं को समझने का एक सशक्त मंच बनेगा।
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लखनऊ में आज 18 फरवरी को इंडिया वॉयस न्यूज़ चैनल द्वारा एक विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। इस कॉन्क्लेव का विषय है, “यूपी का बजट: तरक्की का मास्टर प्लान”, जो उत्तर प्रदेश के आर्थिक भविष्य, विकास की दिशा और नीतिगत प्राथमिकताओं को समझने का एक सशक्त मंच बनेगा।
यह आयोजन लखनऊ में किया जा रहा है, जहाँ सरकार, उद्योग और समाज के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा। कॉन्क्लेव का उद्देश्य केवल बजट पर चर्चा करना नहीं, बल्कि यह समझना है कि आने वाला बजट उत्तर प्रदेश को देश की आर्थिक रीढ़ बनाने में किस तरह निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
इस विशेष कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय ब्रजेश पाठक होंगे। उनके साथ राज्य सरकार के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली मंत्री मंच साझा करेंगे, जिनमें शामिल हैं:
इनके साथ-साथ उद्योग जगत के शीर्ष प्रतिनिधि, निवेशक, उद्यमी, नीति विशेषज्ञ, आर्थिक विश्लेषक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग भी कॉन्क्लेव में अपनी भागीदारी दर्ज कराएंगे।
“यूपी का बजट: तरक्की का मास्टर प्लान” विषय पर आधारित यह कॉन्क्लेव उत्तर प्रदेश के आगामी बजट के हर महत्वपूर्ण पहलू को छुएगा। चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में शामिल होंगे—
रोज़गार सृजन और युवाओं के लिए अवसर
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश
इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास
डिजिटल इंडिया के तहत तकनीकी विस्तार
निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा
उद्योग जगत के प्रतिनिधि सरकार के सामने अपनी अपेक्षाएँ और सुझाव रखेंगे, वहीं सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया जाएगा कि बजट की प्राथमिकताएँ क्या होंगी और किस तरह योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगा।
यह कॉन्क्लेव केवल एक चर्चा मंच नहीं, बल्कि सरकार, उद्योग और समाज के बीच भरोसे और सहयोग का सेतु बनेगा। इस संवाद से यह संदेश जाएगा कि उत्तर प्रदेश का बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने की ठोस कार्ययोजना है।
इंडिया वॉयस का यह आयोजन न सिर्फ नीति निर्माण को दिशा देगा, बल्कि आम जनता को यह समझने का अवसर भी देगा कि आने वाला बजट उनके जीवन, रोज़गार और भविष्य को किस तरह प्रभावित करेगा।