Jaishankar : ‘मिडिल पावर की कोई एक तय और कठोर परिभाषा नहीं हो सकती।’ विदेश मंत्री एस जयशंकर रविवार को दिल्ली के एक कार्यक्रम में मिडिल पावर वाले देशों की भूमिका के बारे में बात कर रहे थे।
पढ़ें :- भारत और कनाडा व्यापार वार्ता, बातचीत का पांचवां दौर शुरू
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ‘यह एक सही बात है। यह सही बात इसलिए है, क्योंकि कुछ ताकतों में बहुत तेज़ी से बढ़ने की काफी क्षमता है। ऐसी क्षमता, जो निकट, कम और मध्यम अवधि में भी काम आ सकती है। मेरा मतलब है, भारत के मामले में क्योंकि हमारे सामने कई दशकों तक तेज़ी से विकास करने का मौका है और हमारे पास ऐसी आबादी है, जो इस विकास को बनाए रखेगी और मैं तो यह भी कहूंगा कि दुनिया अब कहीं ज़्यादा क्रिएटिव हो गई है, जहां कई नई संभावनाएं हैं, इसलिए हमें ज़रूरी नहीं कि औद्योगीकरण के पुराने रास्ते पर ही चलना पड़े। पुराने रास्ते के बजाय हमें कुछ ऐसा नया और आधुनिक सोचना होगा, जो हमारे भविष्य के लिए सही हो।’
‘किसी देश का प्रभाव केवल उसके कुल आकार से तय नहीं होता’
विदेश मंत्री ने कहा कि ‘आज किसी देश का प्रभाव केवल उसके कुल आकार से तय नहीं होता। किसी खास क्षेत्र में मजबूत क्षमता भी वैश्विक राजनीति में उसकी भूमिका बढ़ा सकती है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि कोई देश आर्थिक रूप से बहुत बड़ा न हो, लेकिन सेमीकंडक्टर, तकनीक, ऊर्जा या रणनीतिक व्यापार जैसे क्षेत्र में उसकी भूमिका बेहद अहम हो।’
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ‘नीदरलैंड और यूएई शामिल हैं। ऐसे देशों को समझने के लिए उनकी वास्तविक क्षमता और वैश्विक उपयोगिता को भी देखना जरूरी है। इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात अपनी आर्थिक और रणनीतिक क्षमता के कारण अपने आकार से ज्यादा प्रभाव रखता है। उभरती शक्तियों और मिडिल पावर दोनों को लेकर सोच व्यापक और लचीली रखनी चाहिए।’
पढ़ें :- अखिलेश यादव को राम मंदिर जरूर जाना चाहिए, भगवान का आशीर्वाद लेना चाहिए: भूपेन्द्र सिंह चौधरी
Disclaimer
इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।
देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें।