जंतर-मंतर पर गरमाया SIR विवाद, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग; मनोज झा, नेहा बोरा, योगेंद्र यादव समेत कई नेता हिरासत में
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Delhi: गांधी जयंती के दिन राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर उस वक्त राजनीतिक और नागरिक विरोध का बड़ा केंद्र बन गया, जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं की भीड़ जुटी। प्रदर्शनकारियों ने SIR यानी Special Intensive Revision, मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग की।
प्रदर्शन का आह्वान AISA, RJD के राज्यसभा सांसद मनोज झा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण समेत सामाजिक एवं छात्र नेताओं ने किया था। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी इस आयोजन की प्रमुख आवाजों में शामिल थीं।
प्रदर्शन में अलग-अलग राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों से जुड़े लोग पहुंचे। इनमें RJD सांसद मनोज झा, AAP नेता सौरभ भारद्वाज, पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी, राज्यसभा सांसद संजय सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण समेत कई प्रमुख नाम शामिल रहे।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। प्रदर्शन के दौरान करीब 500 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें आतिशी, सौरभ भारद्वाज, योगेंद्र यादव और नेहा बोरा जैसे नाम शामिल हैं।
RJD के राज्यसभा सांसद मनोज झा इस प्रदर्शन के प्रमुख चेहरों में रहे। उन्होंने प्रदर्शन से पहले नेहा बोरा और प्रशांत भूषण के साथ लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की थी।
आयोजकों ने SIR और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला केवल किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि नागरिकों के मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में भरोसे से जुड़ा है।
मनोज झा प्रदर्शन में खुद पहुंचे और बाद में उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस वाहन से उनके बयान और हिरासत से जुड़े दृश्य भी सामने आए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई के बावजूद अपना विरोध जारी रखने की बात कही।
इस पूरे प्रदर्शन में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। नेहा बोरा, मनोज झा और प्रशांत भूषण ने 30 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा की थी। प्रदर्शन कार्यो ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और SIR के दौरान मतदाता सूचियों को लेकर चिंता जताई। उनका आरोप था कि मतदाता अधिकारों की सुरक्षा और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी, इसके बावजूद नेहा बोरा प्रदर्शन में पहुंचीं। पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में लिया।
योगेंद्र यादव भी प्रदर्शन में शामिल, पुलिस ने लिया हिरासत में
सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान योगेंद्र यादव को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। Indian Express ने उन्हें हिरासत में लिए गए प्रमुख लोगों में शामिल बताया है।
AAP की पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी और दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज भी प्रदर्शन में पहुंचे। पुलिस कार्रवाई के दौरान दोनों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई। इसके साथ AAP से जुड़े अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी रोके जाने की खबरें आईं।सौरभ भारद्वाज के हिरासत में लिए जाने की स्वतंत्र रिपोर्ट भी सामने आई है।
AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया और जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की। रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही रोका गया।
इससे साफ हुआ कि पुलिस की कार्रवाई केवल प्रदर्शन स्थल तक सीमित नहीं थी। जंतर-मंतर की तरफ आने वाले अलग-अलग रास्तों पर भी पुलिस ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोकने की व्यवस्था की थी।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की थी। इसके अलावा SIR के तहत मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण, वोटरों के नामों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पर्याप्त पारदर्शिता और जवाबदेही होनी चाहिए। हालांकि, ये प्रदर्शनकारियों के आरोप और राजनीतिक मांगें हैं। निर्वाचन आयोग अपने स्तर पर चुनावी प्रक्रिया और SIR से संबंधित व्यवस्था का बचाव करता रहा है।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी थी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था और संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक करीब 3,000 से 4,000 लोगों के जुटने की संभावना थी। इसी को देखते हुए नई दिल्ली जिले में अतिरिक्त पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती की गई। पुलिस ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन या मार्च के लिए अनुमति नहीं दी गई थी और एहतियाती कदम उठाए गए थे।
प्रदर्शन के मद्देनजर नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए।
इसका उद्देश्य बिना अनुमति बड़ी सभा, प्रदर्शन और जुलूस जैसी गतिविधियों को नियंत्रित करना था। पुलिस ने लोगों से प्रतिबंधों का पालन करने और प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की।
प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। पुलिस ने कई रास्तों पर बैरिकेड लगाए।
जंतर-मंतर, संसद मार्ग, टॉल्स्टॉय मार्ग, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में यातायात को नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने और प्रभावित इलाकों से बचने की सलाह दी।
प्रदर्शन का सबसे बड़ा असर दिल्ली मेट्रो पर भी दिखाई दिया। सुरक्षा व्यवस्था के तहत 11 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास बंद किए गए।
जनपथ, पटेल चौक,केंद्रीय सचिवालय,राजीव चौक,सेवा तीर्थ,मंडी हाउस,लोक कल्याण मार्ग,INA,चावड़ी बाजार,रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली
हालांकि कुछ प्रमुख स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा जारी रखी गई थी, ताकि मेट्रो नेटवर्क की कनेक्टिविटी पूरी तरह प्रभावित न हो।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी थी और जंतर-मंतर के आसपास बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका थी। इसी के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई।
DMRC ने पुलिस के निर्देश के बाद प्रभावित स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किया। इसका मकसद भीड़ को प्रदर्शन स्थल की तरफ बढ़ने से रोकना और नई दिल्ली इलाके में आवाजाही को नियंत्रित रखना था।
कितने लोगों को हिरासत में लिया गया?
प्रदर्शन के दौरान करीब 500 लोगों को हिरासत में लिया गया है।इनमें कई प्रमुख नेता, छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल बताए गए हैं।
जंतर-मंतर के आसपास पुलिस ने बैरिकेडिंग की। जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे तो पुलिस ने उन्हें रोककर कई लोगों को हिरासत में लिया।
कई प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर आसपास के पुलिस थानों की ओर ले जाया गया। हिरासत में लिए गए लोगों को पुलिस वाहनों के जरिए अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया।
यह सिर्फ राजनीतिक दलों का प्रदर्शन नहीं था। AISA, SFI और अन्य छात्र एवं नागरिक संगठनों के कार्यकर्ता भी इसमें शामिल हुए।
AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा प्रदर्शन की प्रमुख आयोजकों में थीं। आयोजकों ने इसे मतदाता अधिकार, चुनावी पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बताया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवाल लोकतांत्रिक अधिकारों से संबंधित हैं और इन पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाना जरूरी है। जबकि पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई थी और बड़ी भीड़ की संभावना को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए।
यही वजह रही कि गांधी जयंती के दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई दोनों एक साथ चर्चा का विषय बन गए।
बहरहाल जंतर-मंतर पर हुआ यह प्रदर्शन SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहे विवाद का एक बड़ा घटनाक्रम बन गया। RJD सांसद मनोज झा और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा से लेकर योगेंद्र यादव, आतिशी, सौरभ भारद्वाज और संजय सिंह तक कई प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक चेहरे इस विरोध से जुड़े दिखाई दिए।
प्रदर्शनकारियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग उठाई और SIR तथा मतदाता सूचियों को लेकर सवाल किए। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं होने और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शन को नियंत्रित किया।
बैरिकेडिंग, नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत, ट्रैफिक डायवर्जन और 11 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश-निकास बंद किए जाने ने इस प्रदर्शन को सिर्फ जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रहने दिया। मध्य दिल्ली की आवाजाही भी इससे प्रभावित हुई।
फिलहाल इस पूरे विवाद के केंद्र में तीन बड़े सवाल हैं SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची की पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही। प्रदर्शनकारी इन सवालों पर सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांग रहे हैं, जबकि प्रशासन का जोर कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर रहा।
✍️अरविंद कुमार
Disclaimer
इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।
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