H-1B Visa : ‘बंधुआ मजदूर (Indentured servants)’ H -1B वीजा धारकों को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने दूसरे देश के टेक एग्जीक्यूटिव के लिए यह टिप्पणी की। उनका आरोप है कि माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को निकाल दिया और उनकी जगह कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को रख रही हैं। उन्होंने पिछले साल का आंकड़ा बताते हुए कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने 6,000 अमेरिकी वर्कर्स को निकाला था। 6,300 H-1B वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड का लाभ लिया गया।
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भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि ‘हमारा मानना है कि इस तरह के बयान अनुचित हैं और इस तथ्य को नजरअंदाज करते हैं कि अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल लोग हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और नवाचार तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। खुद अमेरिका का इतिहास भी ऐसे प्रवासियों की पीढ़ियों से बना है, जिनके श्रम, उद्यम और नवाचार ने उसकी प्रगति और समृद्धि में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे शब्दों का इस्तेमाल, जिनसे ऐतिहासिक और औपनिवेशिक दौर की पीड़ादायक यादें जुड़ी हों, बेहद आपत्तिजनक है।’
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि ‘ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल करना, जो दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की याद दिलाती हो, बेहद आपत्तिजनक है।’ भारतीय विदेश मंत्रालय ने जेडी वेंस के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप प्रशासन ने परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन पीईआरएम कार्यक्रम को निलंबित करने का फैसला किया है। ऐसे समय में यह टिप्पणी आई है।
H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां भारत जैसे दूसरे देशों से टैलेंटेड लोगों को नौकरी पर रखती हैं। भारतीय लोग इस वीजा का फायदा उठाते हैं। ट्रंप सरकार का मानना है कि जब किसी विदेशी कर्मचारी के पास खास हुनर हो तभी कर्मचारी को अमेरिका बुलाया जाए। इसका मतलब है कि जब जरूरत पड़े तभी कंपनियां बुलाए
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