Delhi : संसद के मानसून सत्र का 14वां दिन भी शोर-शराबे की भेंट चढ़ गया। एक तरफ सरकार विपक्ष को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है, दूसरी ओर राहुल गांधी ने साफ संकेत दे दिया है कि जवाबदेही के बिना किसी नए विधायी एजेंडे पर सहमति मुश्किल है।
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संसद में फिर हुई बातचीत, लेकिन नहीं निकला रास्ता
मानसून सत्र में जारी गतिरोध खत्म करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पिछले दस दिनों में चौथी बार लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक बैठक में संसद की कार्यवाही सामान्य करने, महिला आरक्षण और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने कहा कि इन मुद्दों पर अंतिम फैसला इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दलों से बातचीत के बाद ही लिया जाएगा। बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।
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हंगामा जारी, लेकिन सरकार बढ़ाती रही अपना एजेंडा
संसद में लगातार विरोध के बीच भी सरकार ने अपने विधायी एजेंडे की रफ्तार नहीं रोकी। मानसून सत्र के 14 दिनों के भीतर 1.राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण, 2.जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण, 3.सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या, 4.बैंकर्स बुक्स एविडेंस और 5.कराधान एवं अन्य कानून से जुड़े पांच संशोधन विधेयक दोनों सदनों से पारित करा लिए। सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन वह प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को भी साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है।
राहुल गांधी ने सरकार के सामने रखीं तीन मांगें
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि विपक्ष पहले जवाब चाहता है, उसके बाद ही किसी नए विधेयक पर सहयोग की बात होगी। उन्होंने मांग की कि जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल पर गृह मंत्री संसद में जवाब दें। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में आकर पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखें। इसके अलावा विपक्ष जिन मुद्दों को उठा रहा है, उन पर कार्यसूची में प्राथमिकता के साथ चर्चा कराई जाए।
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परिसीमन और महिला आरक्षण पर क्यों अटकी बात?
बैठक में सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर विपक्ष का समर्थन मांगा, लेकिन कांग्रेस ने फिलहाल कोई स्पष्ट सहमति नहीं दी। विपक्ष का कहना है कि पहले सरकार राजनीतिक और जनहित के सवालों पर जवाब दे, उसके बाद ही बड़े विधेयकों पर आगे बढ़ा जा सकता है।
संसद का रास्ता संवाद से निकलेगा या टकराव से?
राहुल गांधी और किरेन रिजिजू की एक और मुलाकात ने यह जरूर दिखाया कि संवाद के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं, लेकिन भरोसे की कमी अब भी बनी हुई है। सरकार विधायी कामकाज पूरा करना चाहती है, जबकि विपक्ष जवाबदेही को पहली शर्त बता रहा है। ऐसे में मानसून सत्र के बाकी दिनों में संसद की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि पहले कौन अपने रुख में नरमी दिखाता है।
बहरहाल संसद के भीतर बातचीत जारी है, लेकिन बाहर राजनीतिक संदेश भी उतने ही मजबूत दिए जा रहे हैं। फिलहाल तस्वीर यही है कि सरकार और विपक्ष दोनों संवाद की बात तो कर रहे हैं, मगर अपने-अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे। अब अगले कुछ दिन तय करेंगे कि संसद में कानून बनेंगे या फिर हंगामा ही सबसे बड़ी खबर बना रहेगा।
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