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दिल्ली मतदाता सूची विवाद : 47 लाख नाम मसौदा सूची से बाहर, 33 लाख को नोटिस, चुनाव आयोग की सफाई

Delhi : दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं वाली पिछली सूची की तुलना में लगभग 47.7 लाख नाम मसौदा मतदाता सूची में नहीं हैं।✍️अरविंद कुमार 

By HO BUREAU 

Updated Date

Delhi : दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं वाली पिछली सूची की तुलना में लगभग 47.7 लाख नाम मसौदा मतदाता सूची में नहीं हैं, वहीं करीब 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में पिछली सूची से मिलान नहीं होने या तार्किक विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं।

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत कई चर्चित नाम भी नोटिस पाने वालों में शामिल हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में मामले पर सुनवाई हुई और सुनवाई के बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि नोटिस जारी होने का मतलब मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटना नहीं है।

47 लाख नाम मसौदा मतदाता सूची से बाहर

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत बूथ स्तर के अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाता विवरण का सत्यापन किया। इसके बाद 31 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई। पिछली सूची में करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे, जबकि मसौदा सूची में करीब 97.5 लाख नाम दर्ज हुए। यानी करीब 47.7 लाख नाम मसौदा सूची में नहीं दिखाई दिए।

चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, इनमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, दोहरे पंजीकरण और अन्य कारणों से जुड़े मामले शामिल हैं। हालांकि, मसौदा सूची में नाम नहीं होना अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटना नहीं है। पात्र नागरिकों को दावा दाखिल कर अपना नाम शामिल कराने का अवसर दिया गया है।

33 लाख मतदाताओं को क्यों मिला नोटिस?

विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान करीब 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में ऐसी स्थितियां चिन्हित की गईं, जिन पर अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत बताई गई। इनमें करीब 13.80 लाख मतदाता ऐसे बताए गए हैं जिनका मौजूदा रिकॉर्ड पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची से जोड़ा नहीं जा सका। वहीं करीब 19.33 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी दर्ज की गई है।

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यही नोटिस अब पूरे विवाद का प्रमुख केंद्र बन गए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से सवाल उठाया गया है कि मतदाता को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि उसके रिकॉर्ड में कौन-सी विसंगति पाई गई है और नोटिस किस आधार पर जारी किया गया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, पारदर्शिता पर सवाल

दिल्ली एसआईआर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने मतदाता सूची से नामों के बाहर होने और लाखों मतदाताओं को जारी नोटिस की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम, प्रत्येक मामले में नोटिस जारी करने का कारण और ‘तार्किक विसंगति’ तय करने के मानकों को सार्वजनिक करने की मांग की है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब लाखों मतदाताओं के रिकॉर्ड की दोबारा जांच हो रही है, तो उन्हें यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उनके रिकॉर्ड पर आपत्ति किस आधार पर उठाई गई है। मामले से जुड़ी पारदर्शिता याचिका की सुनवाई को लेकर 21 सितंबर की कार्यवाही के साथ 22 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की जानकारी भी सामने आई है। इसलिए मामले में किसी अंतिम न्यायिक आदेश या अंतिम फैसले का दावा अभी नहीं किया जा सकता।

रेखा गुप्ता से जयशंकर और केजरीवाल तक बड़े नामों को नोटिस

एसआईआर की प्रक्रिया में नोटिस पाने वालों में कई चर्चित राजनीतिक नेता और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के नाम सामने आए हैं।

इसके अलावा पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, निर्वाचन आयुक्त एस.एस. संधू और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के निदेशक प्रवीण सूद समेत कई अन्य प्रमुख लोगों को भी नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मामले में उम्र से जुड़ी विसंगति सामने आने के बाद नोटिस जारी हुआ था। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनकी प्रविष्टि को सही पाया गया।

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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद चुनाव आयोग की सफाई

मामले में पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के मुताबिक, किसी मतदाता को नोटिस जारी किया जाना अपने आप में उसका नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आदेश नहीं है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, नोटिस उन मतदाताओं को जारी किए गए हैं जिनके वर्तमान विवरण पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची से नहीं जुड़ पाए या जिनके रिकॉर्ड में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। संबंधित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया जाएगा।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता का नाम बिना सुनवाई का अवसर दिए और उचित, कारणयुक्त तथा अपील योग्य आदेश के बिना नहीं हटाया जा सकता। यानी नोटिस के बाद संबंधित मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और दस्तावेजों के जरिए रिकॉर्ड का सत्यापन कराने का मौका मिलेगा।

30 सितंबर तक दावा, 29 अक्टूबर तक निपटारा

जिन पात्र नागरिकों का नाम मसौदा मतदाता सूची में नहीं है, वे 30 सितंबर 2026 तक दावा दाखिल कर सकते हैं। नोटिस पाने वाले मतदाता भी संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के सामने अपना जवाब और जरूरी दस्तावेज जमा कर सकते हैं। निर्वाचन अधिकारियों को नोटिस से जुड़े मामलों का निपटारा 29 अक्टूबर तक करना है। इसके बाद 4 नवंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है।

अब आगे क्या होगा?

दिल्ली एसआईआर में फिलहाल एक तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और मृत, स्थानांतरित तथा दोहरे पंजीकरण जैसी प्रविष्टियों की पहचान करना है। दूसरी तरफ याचिकाकर्ताओं ने नोटिस के आधार, तार्किक विसंगति के मानकों और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।

ऐसे में 47 लाख नामों का मसौदा सूची में नहीं होना अभी अंतिम तस्वीर नहीं है। दावे, आपत्तियां और नोटिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल होते हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए पारदर्शिता के सवाल और चुनाव आयोग की सफाई के बीच अब निगाहें आगे की न्यायिक कार्यवाही और 4 नवंबर को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर रहेंगी।

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✍️अरविंद कुमार 

Disclaimer

इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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