PM Modi in Bharat Mandapam : पीएम मोदी ने दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने शुक्रवार को कहा कि भारत के सांस्कृतिक केंद्रों का पुनरुद्धार हो रहा है.✍️Avinay Mishra
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PM Modi in Bharat Mandapam : पीएम मोदी ने दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने शुक्रवार को कहा कि ‘भारत के सांस्कृतिक केंद्रों का पुनरुद्धार हो रहा है. चाहे वह काशी विश्वनाथ धाम का नया स्वरूप हो, अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर हो या केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे हमारे पवित्र स्थल हों, ये सभी स्थान अपना पुराना महत्व फिर से प्राप्त कर रहे हैं.’
पीएम मोदी ने कहा कि ‘भारत के सांस्कृतिक केंद्रों का पुनरुद्धार हो रहा है. चाहे वह काशी विश्वनाथ धाम का नया स्वरूप हो, अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर हो या केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे हमारे पवित्र स्थल हों, ये सभी स्थान अपना पुराना महत्व फिर से प्राप्त कर रहे हैं. अगर आप हाल ही में केदारनाथ गए होंगे तो आपने आदि शंकराचार्य की एक भव्य और दिव्य प्रतिमा देखी होगी, जिसे उसी स्थान पर स्थापित किया गया है, जहां उन्होंने अपना नश्वर शरीर त्यागा था. ये सभी स्थल अब अपने पुराने वैभव की ओर लौट रहे हैं.’
उन्होंने कहा कि ‘हमें समाज को उन ताकतों के खिलाफ एकजुट करना होगा, जो हमें बांटना चाहती हैं, नागरिकों के बीच आत्मनिर्भरता को लेकर जागरूकता बढ़ानी होगी और हर व्यक्ति को 2047 तक एक विकसित भारत बनाने के संकल्प से जोड़ना होगा. इन लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में हमें और अधिक सक्रिय होना होगा.’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘मुझे हमारे श्रद्धेय गुरुदेव की जन्म शताब्दी भी याद आ रही है. वर्ष 2015 में मुझे उनकी स्मृति में एक विशेष सिक्का जारी करने का सौभाग्य मिला था. उस समय भी मैंने कहा था कि स्वामी चिन्मयानंद का जीवन ज्ञान, कर्म और भक्ति का एक अद्भुत संगम था.’
पीएम मोदी ने कहा कि ‘स्वामी चिन्मयानंद ने अपना पूरा जीवन इसी मंत्र को समर्पित कर दिया, जिस निष्ठा के साथ वे आध्यात्मिक विषयों पर बात करते थे, उसी निष्ठा और विस्तार के साथ उन्होंने राष्ट्र से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की, क्योंकि हमारा राष्ट्र ही हमारी संस्कृति की जन्मभूमि और हमारे अस्तित्व का आधार है.’
पीएम मोदी ने कहा कि ‘जब देश ने अपनी आज़ादी के 75 साल पूरे किए तो मुझे लगा कि हमें इस मौके का इस्तेमाल सिर्फ एक विकसित भारत के विज़न को प्रेरित करने के लिए ही नहीं करना चाहिए, बल्कि भारत की उस भावना को भी जीवंत करना चाहिए, जो अमर विचारों के साथ जीना जानती है।’
✍️Avinay Mishra
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