1. हिन्दी समाचार
  2. देश
  3. मकर संक्रांति: परंपरा, प्रकृति और पोषण का संगम

मकर संक्रांति: परंपरा, प्रकृति और पोषण का संगम

मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ मनुष्य के गहरे रिश्ते का उत्सव है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण की यात्रा शुरू करता है।

By HO BUREAU 

Updated Date

जब सूर्य करवट लेता है और जीवन में नई शुरुआत होती है

मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ मनुष्य के गहरे रिश्ते का उत्सव है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण की यात्रा शुरू करता है। इसे प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता के आगमन का संकेत माना जाता है। दिन बड़े होने लगते हैं, ठंड धीरे-धीरे ढलान पर आती है और जीवन में नई गति का संचार होता है।

पढ़ें :- मार्च 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव- सियासत का निर्णायक दौर

यह पर्व सौर गणना पर आधारित है, इसलिए हर साल लगभग एक ही तारीख़ 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है, जो इसे अन्य त्योहारों से अलग बनाता है।

इतिहास और धार्मिक महत्व

भारतीय परंपरा में मकर संक्रांति को अत्यंत शुभ माना गया है। शास्त्रों में उत्तरायण काल को देवताओं का दिन कहा गया है, ऐसा समय जब किए गए दान और पुण्य कई गुना फल देते हैं। यही कारण है कि इस दिन स्नान, जप, दान और सूर्योपासना का विशेष महत्व है।

पवित्र नदियों में स्नान को आत्मशुद्धि का प्रतीक माना गया है। यह पर्व हमें प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा देता है जहाँ हर बदलाव को स्वीकार किया जाता है, न कि उससे लड़ा जाता है।

भारत के अलग-अलग रंगों में मकर संक्रांति

भारत में यह त्योहार हर क्षेत्र में अलग नाम और रूप में मनाया जाता है, लेकिन भावना एक ही रहती है, कृतज्ञता और उल्लास।

पढ़ें :- अनुपम खेर का धुरंधर 2 पर दिल खोलकर रिव्यू: "यह फिल्म हिंदुस्तान की है"

🔹 उत्तर भारत – खिचड़ी पर्व
उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व कहा जाता है। इस दिन खिचड़ी पकाई जाती है और दान के माध्यम से समाज के साथ बाँटी जाती है।

🔹 गुजरात – पतंगों से भरा आसमान
गुजरात में यह पर्व पतंग उत्सव के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ आसमान रंगीन पतंगों से भर जाता है और पूरा शहर उत्सव में डूब जाता है।

🔹 तमिलनाडु – पोंगल का उत्सव
दक्षिण भारत में इसे पोंगल कहा जाता है, जो फसल और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है।

🔹 असम – भोगाली बिहू
असम में माघ बिहू के दौरान सामूहिक भोज, पारंपरिक खेल और मिलन की परंपरा निभाई जाती है।

🔹 उत्तराखंड – घुघुतिया की लोकपरंपरा
यहाँ बच्चों द्वारा कौओं को पकवान खिलाने की परंपरा है, जो लोककथाओं और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है।

पढ़ें :- तेल की किल्लत, दुनिया में तनाव… और भारत के लिए नया रास्ता: क्या अब इलेक्ट्रिक गाड़ियां ही भविष्य हैं?

तिल-गुड़ से खिचड़ी तक: स्वाद में छिपा विज्ञान

मकर संक्रांति के पकवान सिर्फ़ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि शरीर की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं।

🌾 तिल और गुड़ शरीर को गर्माहट, ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं।
🍚 खिचड़ी हल्की, सुपाच्य और पोषण से भरपूर होती है- ठंड के मौसम के लिए आदर्श भोजन।
🍛 क्षेत्रीय व्यंजन स्थानीय अनाज और सब्ज़ियों के उपयोग को बढ़ावा देते हैं।

दान-पुण्य और सामाजिक चेतना

इस दिन दान को विशेष महत्व दिया जाता है। तिल, गुड़, अन्न और वस्त्र का दान समाज में संतुलन और संवेदनशीलता को मज़बूत करता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि उत्सव केवल अपने लिए नहीं, दूसरों के साथ साझा करने के लिए होते हैं।

स्वास्थ्य और ऋतुचक्र का संतुलन

सर्दियों के अंत में शरीर को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। मकर संक्रांति के भोजन और दिनचर्या इसी प्राकृतिक ज़रूरत के अनुसार तय की गई है। यह पर्व भारतीय जीवनशैली में छिपे वैज्ञानिक दृष्टिकोण का सुंदर उदाहरण है।

✍️सपन दास  

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook, YouTube और Twitter पर फॉलो करे...
Booking.com
Booking.com