अपने भाषण में ममता ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिनके कंधों पर देश की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है, वे उसे निभाने में नाकाम हो रहे हैं और अपनी नाकामी छिपाने के लिए विपक्ष पर छापे डलवा रहे हैं। यहीं से आया वह वाक्य जिसने आग लगा दी-
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कोलकाता की सियासत में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिस अंदाज़ में सामने आईं, उसने पूरी बहस का रुख ही बदल दिया। मामला सिर्फ़ एक छापेमारी का नहीं रहा- यह शब्दों की जंग बन गया।
जैसे ही चुनावी रणनीतिकारों से जुड़े परिसरों पर ED की कार्रवाई की खबर आई, ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुँच गईं। उनका आरोप साफ़ था, यह जांच नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव की कोशिश है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को डराने और उनकी आंतरिक तैयारियों में सेंध लगाने के लिए किया जा रहा है।
अपने भाषण में ममता ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिनके कंधों पर देश की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है, वे उसे निभाने में नाकाम हो रहे हैं और अपनी नाकामी छिपाने के लिए विपक्ष पर छापे डलवा रहे हैं। यहीं से आया वह वाक्य जिसने आग लगा दी-
“नास्टी नॉटी होम मिनिस्टर”
एक तंज, जो पल भर में सुर्ख़ी बन गया।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कहीं इसे ममता की बेबाकी बताया गया, तो कहीं राजनीतिक मर्यादा की सीमा पार करने का आरोप लगा। मीम्स बने, बहसें चलीं, और टीवी स्टूडियो फिर उसी सवाल पर अटक गए- क्या भाषा मुद्दों से बड़ी हो गई है?
तृणमूल समर्थकों का कहना है कि ममता सत्ता से डरने वाली नेता नहीं हैं। उनके अनुसार, जब संस्थाओं का दुरुपयोग हो, तब तीखी भाषा भी प्रतिरोध का हिस्सा होती है। दूसरी ओर आलोचक मानते हैं कि व्यक्तिगत कटाक्ष असली मुद्दों- बेरोज़गारी, महंगाई, संघीय ढांचे से ध्यान भटका देता है।
एक बात तय है, यह बयान यूँ ही नहीं आया। चुनावी माहौल में हर शब्द एक संकेत होता है। “नॉटी होम मिनिस्टर” का तंज सिर्फ़ एक लाइन नहीं, बल्कि केंद्र बनाम राज्य की खींचतान का प्रतीक बन चुका है।
क्या यह बयान राजनीतिक साहस है या भाषाई उग्रता?
क्या इससे बहस मज़बूत होगी या सिर्फ़ शोर बढ़ेगा?
जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे, लेकिन फिलहाल इतना साफ़ है~ ममता बनर्जी ने एक बार फिर सियासत के तापमान को शब्दों से उबाल दिया है।