भारत सरकार ने बजट 2026 में नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 को लागू करने का निर्णय लिया है, और इसके साथ ही 1 अप्रैल 2026 से कई नए नियम प्रभाव में आएँगे। यह बदलाव पुराने 1961 के कानून से हटकर एक आधुनिक, सरल और डिजिटल-फ्रेंडली टैक्स सिस्टम की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
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भारत सरकार ने बजट 2026 में नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 को लागू करने का निर्णय लिया है, और इसके साथ ही 1 अप्रैल 2026 से कई नए नियम प्रभाव में आएँगे। यह बदलाव पुराने 1961 के कानून से हटकर एक आधुनिक, सरल और डिजिटल-फ्रेंडली टैक्स सिस्टम की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
सबसे पहला बड़ा बदलाव यह है कि कई टैक्स फ़ॉर्म्स के नाम बदल दिए जाएंगे। उदाहरण के लिए:
यह नामकरण परिवर्तन टैक्स नियमों को आसान और संगठित बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
ड्राफ्ट इनकम-टैक्स नियम 2026 में हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर छूट को कई और शहरों तक बढ़ाया गया है। अब सिर्फ़ चार महानगर (जैसे दिल्ली, मुंबई) नहीं, बल्कि
जैसे शहरों में रहने वाले किराएदार भी 50% तक की HRA छूट का पूर्ण लाभ ले सकेंगे — इससे किराए पर रहने वालों की टैक्स बचत बढ़ सकती है।
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार सरकारी भत्तों (ऐलाउंसेज़) में भी बड़ा सुधार है:
इन परिवर्तनों से वास्तविक खर्च पर टैक्स राहत पाने वाले लोगों को लाभ मिलेगा।
नए नियमों में विदेश में कमाए हुए आय (Foreign Income) पर अधिक सख़्त नियम लागू होंगे। यदि कोई व्यक्ति विदेशी टैक्स क्रेडिट का दावा करता है, तो उसे चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित करना आवश्यक होगा, खासकर जहां टैक्स ₹1 लाख से अधिक हो। इससे टैक्स चोरी और डबल टैक्स क्रेडिट की गड़बड़ी को रोकने का प्रयास है।
टैक्सपेयर के लिए इसका प्रभाव
सरकार ने दो महीने पहले इन ड्राफ्ट नियमों को stakeholders के सुझाव के लिए जारी किया है ताकि अंतिम रूप देने से पहले जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएँ भी ली जा सकें।
नए टैक्स नियम 2026 सिर्फ़ “नए फ़ॉर्म्स” का बदलाव नहीं, बल्कि एक नई टैक्स संस्कृति का संकेत हैं।
यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होने के बाद हर टैक्सपेयर की ज़िम्मेदारी और बचत दोनों में अंतर लाएगा, खासकर मध्यम वर्ग और कामकाजी पेशेवरों के लिए, जो टैक्स प्लानिंग में सीधे जुड़े हैं।