BCCI : बीसीसीआई की शुक्रवार को हुई सालाना आम बैठक (एजीएम) में यह फैसला लिया गया कि पुरुष टीम की चयन समिति से जुड़े सभी मामलों पर फैसला लेने का अधिकार बोर्ड के अधिकारियों के पास होगा। हालांकि, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के भविष्य को लेकर बैठक में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। सीनियर पुरुष चयन समिति के चेयरमैन के रूप में अजीत अगरकर की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
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उनका मौजूदा कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक है, लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि उनका अनुबंध बढ़ाया जाएगा या नहीं। यह भी तय नहीं है कि वह 2027 में जिम्बाब्वे, साउथ अफ्रीका और नामीबिया में होने वाले वनडे विश्व कप तक इस पद पर बने रहेंगे या नहीं।
आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल और खैरुल जमाल मजूमदार को आईपीएल गवर्निंग काउंसिल में एक बार फिर निर्विरोध चुना गया है। बीसीसीआई मुख्यालय में एजीएम के बाद बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने बताया कि बैठक सफल रही और सभी फैसले सहमति से लिए गए। उन्होंने कहा कि आईपीएल गवर्निंग काउंसिल में अरुण धूमल और खैरुल जमाल मजूमदार को दोबारा चुना गया है।
शुक्ला ने यह भी बताया कि सीनियर और जूनियर पुरुष चयन समितियों से जुड़े मामलों के लिए मंजूरी मिल गई है, लेकिन चयनकर्ताओं को लेकर अंतिम फैसला बाद में किया जाएगा। अगर अजीत अगरकर मुख्य चयनकर्ता के पद पर आगे नहीं रहते हैं तो बीसीसीआई को तय प्रक्रिया अपनानी होगी। इसके तहत सार्वजनिक विज्ञापन जारी कर आवेदन मंगाए जाएंगे और उम्मीदवारों के इंटरव्यू के बाद नए चयनकर्ता का चयन किया जाएगा।
भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल को अजीत अगरकर के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। अगर बीसीसीआई चयन समिति में बदलाव करने का फैसला करता है तो पार्थिव इस पद के प्रमुख दावेदारों में से एक हो सकते हैं। पार्थिव पटेल इस समय आईपीएल टीम गुजरात टाइटंस के सहायक कोच हैं और साथ ही क्रिकेट कमेंट्री से भी जुड़े हुए हैं। चयन समिति में उनकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चा मार्च 2026 से ही समय-समय पर होती रही है।
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चूंकि पार्थिव को सक्रिय क्रिकेट से संन्यास लिए पांच साल से अधिक समय हो चुका है, इसलिए वह बीसीसीआई के पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं। इसी वजह से उन्हें अजीत अगरकर की जगह लेने के लिए एक मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है, यदि बोर्ड चयन पैनल में बदलाव करने का फैसला करता है।
अजीत अगरकर 3 सितंबर को हुई एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में शामिल नहीं हो पाए थे, क्योंकि उस समय वह ऐसे स्थान पर थे जहां इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। हालांकि, इसके बाद अगरकर नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली गई टी20 सीरीज के मैचों में नजर आए। इस दौरान वह अपनी चयन समिति के अन्य सदस्यों आरपी सिंह और अजय रात्रा के साथ मौजूद थे।
वहीं, मंगलवार को खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला भी स्टेडियम में मौजूद थे। उनके साथ आईसीसी चेयरमैन जय शाह, बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास और अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) के अधिकारी भी उपस्थित रहे। इससे यह संकेत मिला कि दोनों क्रिकेट बोर्डों के बीच अच्छे संबंध और संवाद जारी है।
रांची में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी टेस्ट के लिए संभावित वेन्यू बदलने के बारे में पूछे जाने पर राजीव शुक्ला ने साफ किया कि मीटिंग के दौरान ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा, “नहीं, उस टेस्ट मैच के वेन्यू के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। कुछ मुकाबले थे। इनमें से जो मैच पहले 50 ओवर के होते थे, वे अब 20 ओवर के होंगे।”
बीसीसीआई की एजीएम में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को बोर्ड की सदस्यता देने का मुद्दा भी एजेंडे में शामिल था। हालांकि, कानूनी अड़चनों के कारण उनकी संबद्ध (एफिलिएट) सदस्यता के आवेदन पर फिलहाल फैसला टाल दिया गया है। इसके अलावा, घरेलू क्रिकेट से जुड़े अंपायरों, मैच रेफरी और स्कोरर्स की फीस में अच्छी बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके लिए बीसीसीआई फीस ढांचे की समीक्षा और नई दरें तय करने के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बना सकता है। (आईएएनएस)
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